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केदारनाथ से जुड़े रहस्य: पांच पीठों में सर्वश्रेष्ठ वैराग्य पीठ है बाबा का ये धाम, ऐसा करने पर अधूरी मानी जाती है पूजा

Fri, 06 May 2022 11:38 AM IST
रेनू सकलानी विनय बहुगुणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
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kedarnath dham - फोटो : अमर उजाला
पंच केदार में प्रथम व द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्याहरवें केदारनाथ को हिमवत वैराग्य पीठ के नाम से भी जाना जाता है। भारतवर्ष में स्थापित पांच पीठों में केदारनाथ धाम सर्वश्रेष्ठ है। यहां पहुंचने मात्र से बाबा के भक्तों को पाप से मुक्ति मिल जाती है।

पर्वतराज हिमालय के मेरू व सुमेरू पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी पर स्थित केदारनाथ को पांच नदियों और पांच कुंडों की भूमि कहा जाता है। यहां मंदाकिनी, मधु गंगा, दुग्ध गंगा, सरस्वती व स्वर्गगौरी नदियां हैं। इस धाम को उदक कुंड, रेतस कुंड, अमृत कुंड, हंस कुंड और हवन कुंड की भूमि कहा जाता है। भले ही आपदा के बाद से अभी तक तीन कुंडों का पता नहीं चल पाया है।

समुद्रतल से 11750 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ का नर-नारायण, पांडवों और आदिगुरु शंकराचार्य से संबंध है। मान्यतानुसार नर-नारायण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान आशुतोष ने मानव कल्याण के लिए सदैव इस स्थान पर निवास करने का वचन दिया था।
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केदरनाथ कपाट - फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि द्वापर युग में महाभारत युद्ध में गोत्र व गुरु हत्या के पाप से मुक्ति के लिए पांडव भगवान शिव के दर्शन के लिए हिमालय क्षेत्र में पहुंचे थे, लेकिन शिव उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते और केदारनाथ पहुंच गए। यहां भगवान शिव ने भैंस का रूप धारण कर लिया और भूमिगत होने लगे। तभी भीम ने भैंस की पूंछ पकड़ ली, जिस कारण पृष्ठ भाग ऊपर ही रह गया।
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kedarnath dham - फोटो : अमर उजाला
इसी पृष्ठ भाग की स्वयंभू लिंग के रूप में केदारनाथ में पूजा-अर्चना होती है। भगवान शिव ने यहां पर पांडवों को दर्शन देकर वंश व गुरु हत्या के पाप से मुक्त किया था। नौंवी सदी में आदिगुरु शंकराचार्य भी इस स्थान से सशरीर स्वर्ग गए थे। केदारनाथ में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है, इसलिए केदारनाथ को हिमवत वैराग्य पीठ भी कहा जाता है, जो पांच पीठों में श्रेष्ठ है।
 

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केदारनाथ धाम, चारधाम यात्रा 2022 - फोटो : अमर उजाला
देवभूमि उत्तराखंड के चारधाम में केदारनाथ में पूजा का विशेष महत्व है। यहां भगवान आशुतोष के स्वयंभू लिंग के पृष्ठ भाग की पूजा होती है। जलाभिषेक के साथ ही दूध और घी का लेपन किया जाता है। मान्यता है कि केदारनाथ में भक्त और भगवान का सीधा मिलन होता है। जब तक स्वयंभू लिंग पर घी, चंदन व मक्खन का लेपन नहीं किया जाता, पूजा अधूरी मानी जाती है।
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केदारनाथ के कपाट खुले - फोटो : अमर उजाला
भारतवर्ष में शिवशक्ति के पांच पीठ

पीठ                              स्थान
हिमवत वैराग्य पीठ        केदारनाथ/ऊखीमठ
श्रीशैल सूर्य पीठ            आंध्र प्रदेश
ज्ञानपीठ                      काशी
वीर पीठ                     कर्नाटक
सधर्म पीठ                  उज्जैन
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केदारनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
केदारनाथ भारतवर्ष के पांच पीठों में श्रेष्ठ है। यहां पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। भक्त यहां स्वयंभू लिंग का घी, मक्खन, चंदन से स्वयं लेपन कर प्रभु से सीधे मिलन करते हैं।
 - भीमाशंकर लिंग, रावल केदारनाथ धाम
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