triyuginarayan
मान्यता है कि त्रियुगीनारायण मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यहां शिव-पार्वती ने जिस अग्निकुंड को साक्षी मानकर सात फेरे लिए थे, उसमें तीन युगों से निरंतर अग्नि प्रज्ज्वलित हो रही है। इसीलिए इस मंदिर का नाम त्रियुगी हो गया। कहा जाता है कि यहां शादी करने वाले जोड़ों का वैवाहिक जीवन सुख से बीतता है।