तब परशुराम ने भगवती गंगा से कहा कि वे इन शिलाखंडों को पुरा सहित देश के अन्य क्षेत्रों में स्थापित करेंगे। ये पाषाण निश्चिंत रहें, प्रत्येक सावन में जब भगवान शिव कनखल आएंगे, तब देशवासी गंगाजल ले जाकर इन पाषाणों से गंगा का मिलन कराएंगे। शिव का यह श्रावणी जलाभिषेक पूरे संसार को शांति प्रदान करेगा। प्रख्यात इतिहासकार डॉ. डीआर शर्मा विद्यावास्चपति तथा स्कंद पुराण के अनुसार तब से कांवड़ यात्रा शुरू हुई। श्रावण में पहली कांवड़ परशुराम उठाते हैं और पुरामहादेव में चढ़ाते भी वहीं हैं। करोड़ों देशवासी परशुराम का अनुसरण करते हुए हर की पैड़ी से देश में पैदल यात्रा लेकर कांवड़ चढ़ाने जाते हैं।