2013 में 16-17 जून को आई आपदा के वक्त जब पूरा उत्तराखंड तबाही का दंश झेल रहा था, तभी केदारनाथ धाम के कई चमत्कार भी हुए। जिसे देख लोग आश्चर्य में पड़ गए थे।
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special photo gallery on kedarnath disaster
जब केदारनाथ मंदिर के पीछे से जल प्रलय के साथ मलबे में बड़े-बड़े बोल्डर और पत्थर आए तो एक चमत्कार हुआ। एक बड़ी चट्टान मंदिर के पीछे उस पानी के साथ आई और मंदिर के थोड़ी सी पीछे रुक गई। जब पानी और मलबे का बहाव आया तो उस चट्टान ने बहाव दो तरफ मोड़ दिया और मंदिर को आंच तक नहीं आने दी। जिसके बाद इसका नाम भीम शिला रख दिया गया।
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kedarnath dham after three years of disaster
गांधी सरोवर से आए सैलाब की रफ्तार का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि केदारनाथ मंदिर के बाहर लगे लोहे का बैरिकैटर टेढ़ा मेढ़ा हो गया। मंदिर का चबूतरा तक ध्वस्त हो चुका है। लेकिन वही सैलाब आस्था की सबसे बड़ी नींव यानी केदारनाथ मंदिर को हिलाने में नाकामयाब रहा।
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most horrible photos of kedarnath disaster
सैलाब के बाद एक टीवी चैनल ने मंदिर के अंदर का दृश्य दिखाया था। इस दृश्य में मंदिर के अंदर सैलाब ने जो तबाही फैलाई थी उसके निशान भी दिख रहे थे।
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kedarnath dham after three years of disaster
- फोटो : file photo
शंकराचार्य की मूर्ति को क्षति पहुंची थी। लेकिन मंदिर के अंदर मौजूद नंदी की प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।
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केदारनाथ में बर्फबारी
- फोटो : amar ujala
मंदिर के बाहर स्थित नंदी की प्रतिमा भी सुरक्षित थी।
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most horrible photos of kedarnath disaster
ताज्जुब की बात तो यह थी कि 16 जून 2013 तारीख से काफी महीनों तक मंदिर में शिवलिंग की पूजा नहीं हुई थी फिर भी शिवलिंग पर बेलपत्र मौजूद था। शिवलिंग का आधा भाग मलवे में इस तरह दबा था कि मानो शिव समाधि में लीन बैठे हों।
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kedarnath
मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1076 से 1099 तक राज करने वाले मालवा के राजा भोज ने बनवाया था।
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केदारनाथ धाम
- फोटो : AmarUjala
लेकिन कुछ लोगों के अनुसार यह मंदिर 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने बनवाया था।