2013 में भगवान शिव के धाम केदानाथ में आई आपदा सैकडों जिंदगी निगल गई। इसके चार साल बाद प्रकृति ने एक बार फिर महादेव के धाम के पास तबाही मचाई है। तस्वीरों में देखें, आसमान से बरसी तबाही...
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पिथौरागढ़ जिले में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर धारचूला तहसील मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर मांगती और 65 किलोमीटर दूर मालपा में एक साथ बादल फटने के बाद मची तबाही में कई लोग हताहत हुए हैं। मांगती में एक तो मालपा में चार शव मिले हैं। मांगती में सेना के जवानों समेत कुल नौ लोग लापता बताए गए हैं। खोजबीन का काम शाम के समय रोक दिया गया। मांगती में सेना के ट्रांजिट कैंप को भारी नुकसान पहुंचा है। कैलाश मानसरोवर मार्ग में पड़ने वाले मालपा में इससे पहले 1998 में बादल फटा था, जिसमें 260 लोगों की मौत हो गई थी।
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इस तहसील के मांगती और मालपा में सोमवार तड़के करीब 2.45 बजे बादल फटने के बाद भारी तबाही मच गई। मांगती में सेना का ट्रांजिट कैंप तबाह हो गया है। सेना के सामान से लदी दो गाड़ियां सामान समेत मलबे में दब गई। इन गाड़ियों की निगरानी के लिए तैनात दो जवान भी मलबे में दब गए हैं। मांगती में सेना के एक जेसीओ और पांच जवान घटना के बाद से लापता है। इनके अलावा नेपाल के स्यांकू निवासी आन सिंह, तांकुल निवासी दान सिंह बिष्ट लापता हैं। मांगती में सिर्फ तांकुल निवासी काली देवी (65) पत्नी दान सिंह बिष्ट का शव मिला है। उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। सेना के सूबेदार राजेंद्र सिंह, हवलदार धन सिंह, सिपाही बसी नाथ और नायक नवीन चंद को सेना, आईटीबीपी के जवानों ने सुरक्षित बचा लिया है।
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मालपा से मिली जानकारी के अनुसार वहां होटल चलाने वाले जगत सिंह गर्ब्याल (54) पुत्र तब्दो सिंह निवासी गर्ब्यांग, आशुमति देवी (52) पत्नी जगत सिंह, भवानी देवी (52) पत्नी मोती सिंह और कुमाऊं मंडल विकास निगम के संविदा कर्मचारी सुरेंद्र गर्ब्याल (27) पुत्र दलीप सिंह के शव बरामद कर लिए गए। मालपा में बूंदी निवासी लालती देवी पत्नी पुष्कर सिंह, नाथ सिंह, अंकिता गुंज्याल पुत्री पान सिंह, जयमल सिंह, धन सिंह थापा लापता है। मालपा से लौटे लोगों ने बताया कि वहां पर कल रात करीब 22 लोग मौजूद थे। इनमें से अधिकांश का कोई पता नहीं है। इनमें घोड़े वाले और मजदूर भी शामिल थे। यह लोग कैलाश यात्रियों का सामान ढोने का काम करते थे।
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मालपा में राहत और बचाव का काम करने के लिए गर्ब्यांग गांव के 33 युवक, बूंदी के 25 युवक तड़के पहुंच गए थे। इसके अलावा आईटीबीपी, एसएसबी और सेना के कैंपों में रहने वाले लोग तत्काल मौके पर पहुंच गए। इस स्थान तक प्रशासन के किसी भी व्यक्ति का पहुंच पाना संभव नहीं है क्योंकि सिर्खा की तरफ से आगे बढ़ने के लिए सिमखोला नाले का पुल बह गया है। मांगती में चारों तरफ जानवरों की लाशें बिखरी हैं।
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सेना को कितना नुकसान पहुंचा है इसकी आधिकारिक रूप से किसी ने जानकारी नहीं दी है। एसडीएम आरके पांडे, राजस्व उपनिरीक्षक हुकम सिंह धामी करीब दो बजे मांगती पहुंच गए थे। विधायक हरीश धामी अपने साथ कई लोगों को लेकर एक बजे पहुंचे। उन्होंने राहत और बचाव में हाथ बंटाया। उनके साथ ब्लाक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर, कैलाश रावत समेत कई कार्यकर्ता थे। एसडीएम मांगती में ही रुक गए हैं। वह राहत और बचाव कार्य की निगरानी करेंगे।
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मांगती में मलबे में दबकर मरी काली देवी ने रात करीब 2.45 बजे बादल फटने के बाद जब तबाही मचने लगी तो लोगों को जगाना शुरू किया। उन्होंने काफी शोर मचाया था लेकिन बारिश इतनी तेज थी उनकी आवाज को बहुत कम लोग सुन पाए। आखिरकार लोगों को बचाने के प्रयास में उनकी खुद जान चली गई। मालपा में रुका हुआ सुनील सिंह सोमवार की सुबह महाकाली के उस पार नेपाल में देखा गया। वह अपनी मां भवानी देवी के साथ मालपा में होटल चलाता था। बादल फटने की घटना में भवानी देवी तो मर गई लेकिन सुनील सिंह नदी के पार नेपाल में दिखाई दिया। लोगों का कहना है कि तेज अंधड़ ने सुनील को नेपाल जाकर पटक दिया होगा, वह सुरक्षित है। उसे भारतीय क्षेत्र में लाने के प्रयास चल रहे हैं।
तवाघाट से मांगती के बीच कम से कम पांच स्थानों पर सड़क बंद होने के कारण एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के जवानों को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग गया। धारचूला से सुबह आठ बजे निकले यह लोग अपराह्न पांच बजे पहुंच पाए। तब तक स्थानीय लोगों, सेना ने राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया था।