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महाकुंभ: सोने-चांदी के सिंहासनों पर बैठ शाही स्नान के लिए निकले संत, हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा, तस्वीरें... 

Wed, 14 Apr 2021 08:33 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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कुंभ में शाही स्नान के लिए जाते संत - फोटो : अमर उजाला
महाकुंभ में मेष संक्रांति (बैशाखी) के शाही स्नान पर अखाड़ों के संत रथनुमा वाहनों पर सोने और चांदी के सिंहासनों पर राजसी वैभव के साथ विराजमान होकर हरकी पैड़ी के पास सीसीआर की पार्किंग तक पहुंचे। अखाड़ों के जुलूस में कोरोना से बचाव के नियम भी तार-तार होते दिखे। वहीं, शाम छह बजे तक करीब 13 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया।

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सबसे आगे अखाड़ों की अपनी-अपनी धर्म ध्वजाएं, ईष्टदेव और पंच परमेश्वर अगुवाई कर रहे थे। इसके बाद अखाड़ों के नागा संन्यासियों का पैदल हुजूम और आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और महंत रथों पर सवार थे। उनको देखने के लिए निर्धारित रूटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने संतों पर फूल बरसाकर आशीर्वाद लिया। सरकार की ओर से शंकराचार्य चौक के पास संतों की शोभायात्राओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कराई। 

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हरकी पैड़ी को छोड़कर अन्य गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। नाईसोता, पंतद्वीप, सुभाषघाट, शिव घाट, बिरला घाट, अलकनंदा घाट, गोविंद घाट और प्रेम नगर घाटों पर देर शाम तक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। महाकुंभ का आखिरी शाही स्नान अब 27 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) को होगा। हालांकि, इससे पहले 21 अप्रैल को राम नवमी का पर्व स्नान है। 
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कुंभ में शाही स्नान के लिए जाते संत - फोटो : अमर उजाला
वहीं, बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने सुबह तीन बजे से ही हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड पर स्नान शुरू कर दिया था। सात बजे तक हरकी पैड़ी श्रद्धालुओं से भरी रही। आम श्रद्धालुओं से हरकी पैड़ी को सुबह सात बजे खाली करवाकर अखाड़ों के संतों के स्नान के लिए रिजर्व कर दिया गया था। 
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कुंभ में शाही स्नान के लिए जाते संत - फोटो : अमर उजाला
वहीं, ब्रह्मकुंड हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं की भीड़ को रोकने में धर्मनगरी में बनाए गए अन्य 72 घाट संजीवनी साबित हुए। शाही स्नान के दौरान अधिकतर श्रद्धालु हरकी पैड़ी पर जाने की बजाए इन्हीं घाटों पर पहुंचे। इससे प्रशासन को हरकी पैड़ी पर भीड़ नियंत्रण में काफी राहत मिली। 

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कुंभ में शाही स्नान के लिए जाते संत - फोटो : अमर उजाला
कुंभ को लेकर एक अप्रैल से अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन श्रद्धालु मकर संक्रांति से ही धर्मनगरी में उमड़ने लगे थे। मकर संक्रांति के बाद अखाड़ों के 11 मार्च को हुए पहले शाही स्नान, 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या और बुधवार को हुए बैसाखी के शाही स्नान पर श्रद्धालुओं की भीड़ रोकना पुलिस के लिए कड़ी चुनौती था।
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कुंभ में शाही स्नान के लिए जाते संत - फोटो : अमर उजाला
सुभाष घाट, नाई घाट, गऊ घाट, मालवीय घाट, श्रद्धानंद घाट, प्रेमनगर आश्रम, गोविंद घाट, ओम पुल घाट, बिरला, वीआईपी घाट आदि पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। बुधवार को सभी घाट श्रद्धालुओं से गुलजार रहे। हालांकि, कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते पिछले स्नानों के मुकाबले कम भीड़ देखने को मिली। 
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