नोटबंदी के बाद उत्तराखंड के धनकुबेरों ने आठ से तीस नवंबर के बीच करोड़ों के कालेधन को कहा ठिकाने लगाया इसका खुलासा हो गया है। आठ से तीस नवंबर के बीच करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के जमीनों के 15 सौदे नकद में किए। इन सभी सौदों में हजार-पांच सौ के पुराने नोटों से भुगतान किया गया है। यूं तो इस अवधि में जमीनों के कुल 108 ऐसे सौदे हुए हैं, जिनमें प्रत्येक सौदे का मूल्य 50 लाख रुपये से अधिक है। इन कुल सौदों की कीमत सौ करोड़ रुपये से ज्यादा है। नोटबंदी के बाद कालेधन को प्रॉपर्टी में खपाने की आशंका पर जमीनों की खरीद-फरोख्त की जांच के लिए राज्य सरकार के आदेश पर जुटाए गए आंकड़ों में ये तथ्य सामने आए हैं।
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money
इनमें जमीनों के तमाम सौदे ऐसे भी हैं, जो मार्केट वैल्यू से कम तो कुछ मार्केट वैल्यू से छह गुना अधिक कीमत पर किए गए हैं। इनमें बेनामी संपत्ति के कई मामले होने की भी आशंका है, जिन पर स्थानीय जांच एजेंसियों के साथ आयकर विभाग की भी नजर है। सीएम हरीश रावत के निर्देश पर नोटबंदी के बाद की अवधि में केवल 50 लाख रुपये मूल्य से अधिक की संपत्ति की खरीद-फरोख्त के आंकड़े ही जुटाए गए हैं, जबकि आयकर विभाग इस अवधि में हर उस सौदे की जांच करेगा, जिसमें दो लाख रुपये से अधिक की नकदी का लेन-देन हुआ होगा।
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जमीन
बीती आठ नवंबर की रात से हजार और पांच सौ के नोटों पर पाबंदी लगा दी गई थी। प्रधानमंत्री की इस घोषणा के साथ यह व्यवस्था भी की गई थी कि चलन से बाहर हुए नोटों को या तो खातों में जमा किया जाएगा या फिर बैंक इन्हें नए नोटों से बदलेंगे। ऐसा करने के बजाए कई लोगों ने प्रचलन से बाहर किए गए पुराने नोटों को जमीनों के सौदों में खपाना शुरू कर दिया। जमीन खरीद-फरोख्त में पुरानी करेंसी के इस्तेमाल के सर्वाधिक मामले देहरादून के हैं। रुड़की का तो एक मामला ऐसा भी है, जहां लगभग ढाई करोड़ मार्केट वैल्यू की संपत्ति को मात्र साढ़े चार लाख नकद राशि में बेचना दिखाया गया है। बहरहाल, इस प्रकार के ट्रेंड को देखकर कहा जा सकता है कि इसमें बड़ी संख्या में बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की गई है।
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सीएम हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
गौरतलब है कि करीब पखवाड़ा भर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश में हुए पचास लाख से अधिक मूल्य के सौदों की जांच करवाने के निर्देश दिए थे। इसी कवायद के तहत आठ से 30 नवंबर के बीच 108 प्रॉपर्टी खरीद के मामले चिह्नित किए गए हैं। दिसंबर माह में खरीद के मामले अभी आने बाकी हैं। नोटबंदी की अवधि में 50 लाख रुपये मूल्य से कम के भी सौदे बड़ी संख्या में हुए हैं। इनमें भी कई मामले ऐसे हैं, जिनमें नकद भुगतान किया गया है।
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income tax department
राज्य सरकार की जांच एजेंसियों ने ऐसे आंकड़े नहीं जुटाए हैं, मगर केंद्रीय जांच एजेंसियां इन्हें जरूर खंगालेंगी। दरअसल, आयकर कानून के मुताबिक ऐसे सभी सौदे जो 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य के होते हैं, उसकी जानकारी आयकर विभाग को अनिवार्य रूप से देने का नियम है। मगर हाल ही में एक संशोधन के बाद एक जून से चल और अचल संपत्ति से जुडे़ सभी प्रकार के ऐसे लेन-देन जिनका मूल्य दो लाख रुपये से अधिक हो, उनकी सूचना भी आयकर विभाग को दी जाएगी। ऐसे में इन सभी सौदों पर आयकर का शिकंजा कसना तय है।
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रुपया
10 नवंबर को अनूप कुमार चैटर्जी ने गंभीर सिंह राणा को एक संपत्ति एक करोड़ तीस लाख में बेची, जिसका बाजार मूल्य 58 लाख 96 हजार रुपये था। 11 नवंबर को देहरादून के बाबू लाल ने भगवान सिंह को 52 लाख 15 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति 45 लाख रुपये में बेची। 11 नवंबर को ही अंकित लुंबा पुत्र नरेंद्र कुमार ने अंकिता साहनी को 75 लाख 85 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति नकद में खरीदना दिखाया है। 17 नवंबर को देहरादून में मो. इलियास ने नीलम आनंद को संपत्ति बेची, जिसका बाजार मूल्य 82 लाख 6 हजार रुपये था, जबकि इसको 65 लाख रुपये में बेचना दिखाया गया है।
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18 नवंबर को देहरादून के ही वाईके सरीन ने पवनेश अरोड़ा को एक करोड़ दस लाख रुपये मूल्य की संपत्ति बेची है। 19 नवंबर को ऊधमसिंह नगर की फर्म मेसर्स श्रीराम एग्रो साइसेंस प्राइवेट लि. ने प्रेरणा चौहान को 1 करोड़ 16 लाख रुपये की संपत्ति नकद में बेचना दिखाया है। 21 नवंबर को देहरादून के संजय मदान ने एक करोड़ 11 लाख मूल्य की संपत्ति ज्ञान प्रापर्टीज प्राइवेट लि. के सुमित प्रकाश गुप्ता को इतने ही मूल्य पर नकद में बेची। 21 नवंबर को डॉ. नेम कुमार ने ज्ञान प्रापर्टीज प्राइवेट लि. के डायरेक्टर सुमित प्रकाश गुप्ता को 92 लाख 19 हजार रुपये की संपत्ति नकद में बेची।
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21 नवंबर को देहरादून के सुनील बांगिया ने 55 लाख 79 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति ज्ञान प्रॉपर्टीज के डायरेक्टर सुमित प्रकाश गुप्ता को नकद धनराशि लेकर बेचना दिखाया है। 21 नवंबर को देहरादून के देवी राम ने राजेंद्र सिंह उर्फ राजू को 51 लाख 15 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति 48 लाख रुपये में बेची है। खरीदार ने पैन के बजाए फॉर्म-60 लगाया है। 21 नवंबर को रुड़की की सरोज अग्रवाल ने विपुल अग्रवाल को दो करोड़ 43 लाख की संपत्ति को मात्र साढ़े चार लाख नकद पैसे देकर बेचना दिखाया है। 25 नवंबर को द एक्जिक्यूटिव बोर्ड ऑफ मेथोडिस्ट चर्च की ओर से मुन्नागी अल्फ्रेड डेनियल ने संजय नारंग को दो करोड़ 68 लाख की संपत्ति तीन करोड़ में बेची है।
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29 नवंबर को देहरादून के अमित अरोड़ा ने दिनेश चौहान को 72 लाख 72 हजार रुपये की संपत्ति 60 लाख रुपये नकद में बेचना दिखाया है। खरीदार ने पैन के बजाए फार्म-60 लगाया है। 30 नवंबर को देहरादून के पुनीत शर्मा ने ज्ञान प्रापर्टीज प्राइवेट लि. के सुमित प्रकाश गुप्ता को ही दो करोड़ 38 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति नकद धनराशि लेकर बेची। 30 नवंबर को देहरादून के मेसर्स विस्टा रियलस्केप प्रा. लि. ने एम्मानुएल सिंह को 51 लाख 18 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति 81 लाख 86 हजार नकद राशि लेकर बेचना दिखाया है।
नोट बंदी के दिन यानी आठ नवंबर को भी तमाम बड़े लेन-देन नकद पैसे से किए गए हैं। इसमें रुद्रपुर के वीर सिंह ने सुखविंदर कौर को 30 लाख 91 हजार रुपये की एक संपत्ति को दो करोड़ रुपये में बेचना दिखाया है। हैरानी की बात यह है कि खरीदार और विक्रेता दोनों के पास पैन नहीं हैं। दोनों की ओर से फॉर्म-60 लगाकर रजिस्ट्री कराई गई है। इसी तरह देहरादून के नरेश अग्रवाल ने चेतना वैद उनियाल को आठ नवंबर की तारीख में 51 लाख 78 हजार रुपये की संपत्ति नकद 53 लाख 50 हजार रुपये लेकर बेचना दिखाया है। वहीं देहरादून की गीता नौटियाल ने प्रदीप कुमार वालिया को 70 लाख रुपये नकद पैसे लेकर संपत्ति की रजिस्ट्री कराई है।