उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कुमाऊंनी खड़ी होली का आयोजन किया गया। इस दौरान होल्यार होली के गीतों और गुलाल में झूमते नजर आए। कुमाऊं में शास्त्रीय रागों पर आधारित बैठकी और कदमताल के साथ खड़ी होली में समूहबद्ध होकर होली गायन किया जाता है। शास्त्रीय रागों में काफी, जंगला काफी, विहाग, देश, जैजैवंती, परन, बागेश्वरी, श्याम कल्याण, परज, झिंझोटी, जोगिया, भैरवी, खम्माज, पीलू, बहार आदि रागों में होली गायन होता है। खड़ी होली में समूहबद्ध होकर गायन करते हैं। इसमें दो पक्ष बनाए जाते हैं। एक पक्ष होली गायन शुरू करता है तो दूसरा पक्ष उन स्वरों को दोहराता है। होली गायन में हारमोनियम, तबला, ढोलक, ढोल, दमाऊं, मजीरा, हुड़का समेत तमाम स्थानीय वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। देहरादून में हमारी पहचान रंगमंच संस्था की ओर से आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में कलाकारों ने ढोल दमाऊं की धुन पर खड़ी होली खेली। टपकेश्वर वैष्णव माता मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में सिद्धि को दाता विघ्न विनाशन होली खेले गिरिजापति नंदन... भजन की प्रस्तुति से माहौल भक्तिमय हो गया।