फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज मसूरी में लगा ऐतिहासिक मौण मेला, बहती नदी में कूद पड़े हजारों लोग, जानिए क्या है माजरा

Fri, 28 Jun 2019 01:56 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मसूरी
विज्ञापन
1 of 5
- फोटो : फाइल फोटो
जौनपुर क्षेत्र के ऐतिहासिक मौण मेले का आयोजन आज अगलाड़ नदी तट पर हुआ। मेले की तैयारियां कर ली गई थीं। अगलाड़ नदी तट पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मौण मेले के लिए औषधीय पौधे टिमरू का पाउडर बनाने का प्रावधान है।
 
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : फाइल फोटो
इस बार टिमरू का पाउडर तैयार करने की जिम्मेदारी खिलवाड़ खत की उप पट्टी अठज्यूला के आठ गांवों कांडी मल्ली व तल्ली, सड़ब मल्ली व तल्ली, बेल परोगी तथा मेलगढ़ को दी गई थी। इन गांवों में पिछले 10 दिनों से टिमरू का पाउडर बनाने की प्रक्रिया चल रही थी।
 
विज्ञापन

3 of 5
- फोटो : फाइल फोटो
आज जौनपुर के कई गांवों के ग्रामीणों की मौजूदगी में पाउडर अगलाड़ नदी के मौणकोट नामक स्थान पर अगलाड़ नदी में डाला गया। इस पर्व में जौनपुर के ग्रामीण के अलावा विकासनगर, मसूरी और रवाई घाटी के हजारों की तादाद में ग्रामीण मछली पकड़ने के लिए पहुंचे।

4 of 5
मौण मेला का महत्व
इस ऐतिहासिक मेले की शुरुआत 1866 में तत्कालीन टिहरी नरेश ने की थी। तब से जौनपुर में निरंतर इस मेले का आयोजन किया जाता है। क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि इसमें टिहरी नरेश स्वयं अपने लाव लश्कर एवं रानियों के साथ मौजूद रहते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मौण, टिमरू के तने की छाल को सुखाकर तैयार किए गए महीन चूर्ण को कहते हैं। टिमरू का उपयोग दांतों की सफाई के अलावा कई अन्य औषधियों में किया जाता है। अगलाड़ नदी के पानी से खेतों की सिंचाई भी होती है। मछली मारने के लिए नदी में डाला गया टिमरू का पाउडर पानी के साथ खेतों में पहुंचकर चूहों और अन्य कीटों से फसलों की रक्षा करता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें