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Himalaya Diwas 2021: मानवीय हस्तक्षेप रुका तो और भी दमक उठा हिमालयी क्षेत्र, देखें तस्वीरें...

Thu, 09 Sep 2021 02:44 PM IST
अलका त्यागी विमल सिंह, अमर उजाला, गोपेश्वर

सार

कोरोना के कारण पिछले दो वर्षों से यात्रा और पर्यटन गतिविधियां सीमित हो गई हैं, जिससे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले वन्य जीवों से लेकर कई तरह की वनस्पति और फूल खिले दिख रहे हैं। रुद्रनाथ ट्रेक पर कस्तूरी मृग देखे जा रहे हैं, जबकि इस क्षेत्र में वर्षों से इस मृग को नहीं देखा गया था।
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उत्तराखंड हिमालय दिवस: हिमालय की खूबसूरत तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
इंसानी गतिविधियां कम होने से हिमालयी क्षेत्र पुराने स्वरूप में लौटने लगा है। जो वन्य जीव और फूल कम दिखते थे वह निचले क्षेत्रों में भी आसानी से नजर आ रहे हैं। हिमालयी क्षेत्रों में कस्तूरी मृग, थार, घुरड़ सहित अन्य जीवों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जबकि कस्तूरी कमल और फेन कमल जो बहुत कम दिखते थे वह भी जगह-जगह खिले हुए हैं। 

कोरोना के कारण पिछले दो वर्षों से यात्रा और पर्यटन गतिविधियां सीमित हो गई हैं, जिससे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले वन्य जीवों से लेकर कई तरह की वनस्पति और फूल खिले दिख रहे हैं। रुद्रनाथ ट्रेक पर कस्तूरी मृग देखे जा रहे हैं, जबकि इस क्षेत्र में वर्षों से इस मृग को नहीं देखा गया था।

घुरड़ की संख्या में भी इजाफा हुआ है। चोपता में थार और राज्य पक्षी मोनाल की संख्या भी अधिक आंकी गई है। फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब सहित अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ब्रह्मकमल के साथ कस्तूरी कमल और फेन कमल भी काफी संख्या में दिख रहे हैं।
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हिमालय की खूबसूरत तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
फेन कमल और कस्तूरी कमल ऐसा पुष्प है जो सामान्य तौर पर कम नजर आता है, लेकिन इस बार यह भी इन रास्तों पर खिला हुआ है। ब्रह्मकमल भी इस बार पहले के मुकाबले काफी अच्छी संख्या में खिले हुए हैं।
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हिमालय की खूबसूरत तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से वन्य जीव प्रभावित होते हैं। शांत वातावरण मिलने पर जहां वह आसानी से विचरण करते रहते हैं वहीं उनकी प्रजनन क्षमता भी बढ़ जाती है। दो वर्षों में मानवीय गतिविधियां कम होने से वन्य जीवों का परिवार बढ़ रहा है।

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हिमालय की खूबसूरत तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
यही कारण है कि कस्तूरी मृग सहित दूसरे वन्य जीव जो अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भी मुश्किल से नजर आते थे इस बार निचले इलाकों में विचरण करते देखे आ रहे हैं। वहीं बुग्यालों सहित अन्य क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा काफी कम हो गया है।
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हिमालय की खूबसूरत तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार कस्तूरी मृग, थार, घुरड़ और मोनाल अधिक दिख रहे हैं। मानवीय हस्तक्षेप कम होने पर वन्य जीवों में प्रजनन क्षमता बढ़ जाती है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बहुत कम दिखने वाले कस्तूरी कमल और फेन फ्लावर भी हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में खिले हुए हैं।
- अमित कंवर, डीएफओ केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग, गोपेश्वर, चमोली।
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बुग्यालों में बारामासी हरियाली बिखरी
भूस्खलन से खंडित हो चुके बुग्याल क्षेत्र को केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने न सिर्फ पुनर्जीवित कर दिया है, बल्कि वहां हो रहा भूस्खलन भी रुक गया है। पिछले साल तक जो मैदान सूखा हुआ था वह इस बार बुग्याल से हरा-भरा हो गया है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मंडल और चोपता जैसे सुरम्य बुग्याल स्थित हैं। बुग्यालों में बारामासी हरियाली बिखरी रहती है, लेकिन कई जगहों पर भूस्खलन और मवेशियों के चरान से बुग्याल क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। बीते दो माह में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने प्रभाग के अंतर्गत दो बुग्यालों को संरक्षण देकर फिर से पुनर्जीवित कर दिखाया है।
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राज्य पुष्प बह्मकमल
कोरोना काल में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मानव की चहलकदमी बंद होने से प्रकृति चहक उठी है। राज्य पुष्प बह्मकमल से लकदक मध्य हिमालय के बुग्याल और वादियां इसकी गवाही दे रही हैं। केदारनाथ, द्वितीय केदार मद्महेश्वर सहित अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों ब्रह्मकमल पहाड़ों की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। केदारनाथ आपदा के बाद यह दूसरा मौका है जब इतनी तादाद में ब्रह्मकमल नजर आ रहे हैं। मध्य हिमालय क्षेत्र में समुद्रतल से लगभग 12 हजार फिट की ऊंचाई पर पाया जाने वाले ब्रह्मकमल को वर्ष 2003 में किए गए सर्वे के बाद केंद्र सरकार ने संकटग्रस्त श्रेणी का पुष्प घोषित किया था। ब्रह्मकमल इंडियन हिमालय रिजन के 12 राज्यों में पाया जाता है। 
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