उत्तराखंड की विधानसभा में बृहस्पतिवार को एक बार फिर संसदीय परंपराएं तार-तार हो गई। विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के चलते खुद अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के नव प्रभात को पीठ की व्यवस्था देने को असंवैधानिक करार देते हुए भाजपा ने लगभग दो घंटे सदन की कार्यवाही बाधित की।
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uttarakhand assembly
- फोटो : अमरउजाला
इस दौरान विपक्ष वेल में उतर आया। पीठ तक पहुंचने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी। प्रस्तावों की प्रतियों को गोले बनाकर फैंकने से लेकर मेज पर लगा माइक तक उखाड़ दिया।
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uttarakhand assembly
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पीठ तक पहुंचने की कोशिश में कुर्सी तक उठा कर फैंकी, लेकिन मार्शलों के साथ बीचबचाव से कोई चोटिल नहीं हुआ।
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harish rawat in uttarakhand assembly
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सुबह 11 बजे जैसे ही सदन शुरू हुआ, विधानसभाध्यक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि चूंकि उनके और उपाध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव है। लिहाजा वह अधिष्ठाता समिति के वरिष्ठतम सदस्य विधायक नवप्रभात को पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपते है।
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गोविंद सिंह कुंजवाल
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इतना कहने के बाद अध्यक्ष कुंजवाल पीठ से उठकर चले गए। पीठासीन अधिकारी नवप्रभात जैसे की कुर्सी पर बैठे तभी विपक्षी भाजपा विधायकों ने हंगामा कर दिया।
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uttarakhand assembly
- फोटो : अमरउजाला
नेता प्रतिपक्ष समेत सभी विधायकों ने एक सुर में कहा कि पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने का अधिकार विधानसभाध्यक्ष को कतई नहीं है। वहीं सत्ता पक्ष ने संविधान की धारा 180/2 का हवाला देते हुए कहा कि पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने का अधिकार है।
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uttarakhand assembly
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एक तरफ नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और विधायक मदन कौशिक मोर्चा संभाले हुए थे तो दूसरी तरफ खुद प्रोटेम स्पीकर और नेता सदन हरीश रावत डटे रहे। हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष शांत बैठा रहा, जबकि भाजपा विधायक लगातार पीठ पर कागज, किताब फैंकते रहे।
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नव प्रभात
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आखिरकार एक घंटे तक संवैधानिक प्रक्रिया का हवाला देते एक दूसरे को घेरने के बाद पीठासीन अधिकारी ने सदन एक बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
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uttarakhand assembly
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जिसे बाद में 15 -15 मिनट के लिए बढ़ाया गया लेकिन जैसे ही डेढ़ बजे सदन दोबारा शुरू हुआ, पीठासीन अधिकारी को लेकर दोबारा बवाल हो गया।
जैसे ही नव प्रभात ने हंगामे के बीच अविश्वास प्रस्ताव पर मत आमंत्रित कर वोटिंग करवाई तो विपक्ष ने सदन का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद शाम साढ़े तीन बजे तक बिना विपक्ष के सदन की कार्यवाही चली।