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उत्तराखंड: शिक्षा मित्रों को HC से झटका, बिना TET पास नियुक्तियां होंगी रद्द

Wed, 28 Sep 2016 12:20 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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हाईकोर्ट भवन नैनीताल - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को हाईकोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण न करने वाले शिक्षक मित्रों को जोर का झटका दिया है। हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों की नियुक्ति प्रारंभिक शिक्षक के रूप में करने के मामले पर सुनवाई के बाद टीईटी न करने वाले  उन शिक्षा मित्रों को हटाने के निर्देश दिए हैं।
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नैनीताल उच्च न्यायालय - फोटो : ‌file photo
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकल पीठ में ऊधमसिंह नगर निवासी ललित व अन्य की याचिका में कहा गया था कि सरकार  ने  शिक्षा  मित्रों को बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा के शामिल किया है, जो कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 23  (2) का उल्लंघन है।
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नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI
शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 23 के अनुसार अध्यापक की नियुक्ति में यदि कोई छूट प्रदान  की जाती है तो वह केवल भारत सरकार गजट अधिसूचना के जरिए कर सकती है। भारत सरकार की ओर से अध्यापक पात्रता में कोई छूट नहीं दी गई  है।

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टीचर - फोटो : demo pic
पात्रता की छूट एनसीटीई के 17 फरवरी 2014 के पत्र के अनुसार दी  गई है। यह भी गलत है। छूट देने का प्रावधान अधिनियम में केवल भारत   सरकार को है। एनसीटीई को केवल शैक्षिक  अर्हता लागू करने का अधिकार है।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय - फोटो : PTI
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने  इलाहाबाद  हाईकोर्ट की ओर से पारित शिक्षा मित्रों के निर्णय का भी हवाला दिया। कहा गया कि इसमें शिक्षा मित्रों की नियुक्ति प्रारंभिक शिक्षक के रूप में  करना अवैध ठहराया गया है।
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टीचर - फोटो : Demo pic
सरकार ने राज्य में लगभग 3652 शिक्षा मित्रों की नियुक्ति सहायक अध्यापक पद पर की है, हालांकि इसमें कुछ शिक्षक टीईटी पास भी है। पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि अध्यापक बनने के लिए टीईटी अनिवार्य है।
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
कोर्ट ने दी गई छूट को अवैधानिक करार देते हुए सरकार द्वारा नियमावली में किए गए परिवर्तन को निरस्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने बगैर टीईटी पास शिक्षा मित्रों को सेवा से हटाने व पात्र शिक्षकों को उनके स्थान पर नियुक्त करने के निर्देश दिए।
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