हरिद्वार जिले के एक छोटे से गांव की बेटी दीक्षा चौहान यूरोप महाद्वीप के स्वीडन में योग की रोशनी फैला चुकी है और अब जर्मनी में लोगों को योग की शिक्षा दे रही है।
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तस्वीरें, उत्तराखंड की इस बेटी के कारण योगमय हुआ स्वीडन
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शौक और लगन के संगम से महज 21 साल की उम्र में योग शिक्षिका बनीं दीक्षा विदेशियों को योग के करीब ला रही हैं। गांव फेरुपुर रामखेड़ा निवासी दीक्षा ने पढ़ाई का शुरुआती सफर गांव से तय करते हुए शिवडेल स्कूल में पूरा किया। इसके बाद उन्होंने हरिद्वार एसएमजेएन पीजी कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की।
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बदलते परिवेश के बीच लोकप्रियता के आसमान पर फैलते योग की चमक ने दीक्षा का ध्यान खींचा तो उन्होंने इसे करियर के तौर पर अपना लिया। फिर उन्होंने ऋषिकेश के आनंद प्रकाश योग आश्रम में धीरे-धीरे योग की बारीकियां सीखीं और योग शिक्षिका के तौर पर खुद को बुलंद किया।
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महज 21 वर्ष की उम्र में विदेशों में योग का डंका बजा रहीं दीक्षा कहतीं हैं कि पहले शौक में योग करना शुरू किया था, लेकिन इसके बाद लगन के साथ इस क्षेत्र में मेहतन की और खुद को इस कार्य से जोड़ा।
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उन्होंने इसी साल साधना योग ट्री संस्था का भी गठन किया है। पिता कृष्ण चौहान और माता रजनी चौहान बेटी की कामयाबी पर कहते हैं कि दीक्षा ने जी-तोड़ मेहनत करते हुए ये मुकाम छुआ है।
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इस बीच कईं मुश्किलों ने भी रास्ते में अड़चनें डाली, लेकिन दीक्षा ने खुद पर इन्हें हावी नहीं होने दिया। दीक्षा स्वीडन के मेलमो स्थान पर योग की कक्षाएं संचालित कर चुकी हैं। अब वह जर्मनी के हेडलपर्क शहर में 17 से 23 जून तक चलने वाले शिविर में योग क्रियाएं करा रही हैं।