एक कहावत हम सबने सुनी है ‘उल्टी गंगा बहा दी’। सुल्तानपुर क्षेत्र के पंचेवली गांव में यह महज कहावत नहीं है बल्कि यहां वास्तव में उल्टी गंगा बहती है। यहां पूरब से पश्चिम को बहने वाली गंगा को पश्चिमी बहणी गंगा के नाम से जाना जाता है। करीब आधा किलोमीटर उल्टी बहने के बाद गंगा फिर उत्तर से दक्षिण की ओर बहने लगती हैं।
विज्ञापन
तस्वीरें, पांडव के वंशजों ने पाप धोने के लिए बहा दी उल्टी गंगा
2 of 4
जानकारों का कहना है कि इसके पीछे भौगोलिक कारण हैं। इस पौराणिक स्थल से पांडव एवं उनके वंशजों की कई कथाएं भी जुड़ी हैं। हर साल यहां लगने वाले मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु गंगा में स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। सुल्तानपुर क्षेत्र के पंचेवली गांव के पास एकमात्र ऐसा स्थान है जहां गंगा करीब आधा किलोमीटर तक पूरब से पश्चिम की तरफ बहती हैं।
विज्ञापन
तस्वीरें, पांडव के वंशजों ने पाप धोने के लिए बहा दी उल्टी गंगा
3 of 4
यहां स्थित पौराणिक पंचलेश्वर महादेव मंदिर पर हर साल महाशिवरात्रि और गंगा दशहरा पर मेले का आयोजन होता है। जिसमें हजारों श्रद्धालु आकर मत्था टेकते हैं और गंगा में स्नान करते हैं।
तस्वीरें, पांडव के वंशजों ने पाप धोने के लिए बहा दी उल्टी गंगा
4 of 4
मंदिर के पुजारी भभूति गिरी महाराज बताते हैं कि इस स्थान के बारे में मान्यता है कि पांडवों के वंशज यहां मन का पाप धोने के लिए आए थे। इसके अलावा इस स्थान पर अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडवों के आकर ठहरने की भी कथा बताई जाती है।