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हरक सिंह के दिल में अभी भी भाजपा: इस बोर्ड को देखकर हो रही चर्चा, पूर्व कैबिनेट मंत्री का पार्टी से प्यार नहीं हुआ है खत्म

Thu, 31 Mar 2022 09:34 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं के टिकट के लिए हरक सिंह रावत को भाजपा से विदा लेनी पड़ी थी, लेकिन उनके यह कदम सही साबित नहीं हुआ। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कुछ दिन पहले कहा कि उनके राजनीतिक जीवन के 40 साल में पहली बार उनका पुर्वानुमान गलत साबित हुआ है।
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harak singh rawat - फोटो : AmarUjala
पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को भाजपा ने बेशक पार्टी से निकाल दिया है लेकिन शायद हरक अभी तक भाजपा को दिल से नहीं निकाल पाए। डिफेंस कालोनी स्थित उनके आवास के बाहर लगा बोर्ड देखकर लोग कुछ इसी तरह की चुटकियां ले रहे हैं।

विधानसभा से नजदीक ही डिफेंस कालोनी है। कालोनी की मुख्य सड़क पर ही पहले मंत्री सुबोध उनियाल के आवास का बोर्ड आता है। इसी दिशा में अगली सड़क आती है, जिस पर एक बोर्ड लोगों का ध्यान खींच रहा है। इस बोर्ड पर निवास, डॉ. हरक सिंह रावत, मंत्री, उत्तराखंड सरकार लिखा हुआ है।

इसके साथ ही भाजपा का चुनाव चिन्ह भी बना हुआ है। एक तीर का निशान है जो कि आवास की दिशा बता रहा है। आने-जाने वाले लोग यह बोर्ड देखकर चुटकी ले रहे हैं कि भले ही भाजपा ने हरक को निकाल दिया लेकिन हरक के दिल से अभी भाजपा नहीं निकली है।
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हरक सिंह रावत के निवास पर लगा बोर्ड - फोटो : अमर उजाला

पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं के टिकट के लिए हरक सिंह रावत को भाजपा से विदा लेनी पड़ी थी, लेकिन उनके यह कदम सही साबित नहीं हुआ। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कुछ दिन पहले कहा कि उनके राजनीतिक जीवन के 40 साल में पहली बार उनका पुर्वानुमान गलत साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें डोईवाला से चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। 

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pushkar singh dhami, harak singh rawat - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

हरक सिंह ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की 37-38 सीटें आने का अनुमान लगाया था, लेकिन उनका यह पुर्वानुमान गलत साबित हुआ। चुनाव के दौरान जब वह राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रहे थे, तभी भाजपा के झंडे-डंडों ने काफी हद तक चुनावी हवा का रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं है कि भाजपा ने उन्हें निकाल दिया या वह चुनाव नहीं लड़ पाए।

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हरक सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

भाजपा में रहते हुए भी उनकी पुत्रवधू को और उन्हें टिकट दिया जा रहा था। यह ऑफर कांग्रेस से भी था लेकिन इस बार उन्होंने पहले चुनाव न लड़ने का मन बना लिया था। भाजपा में रहते हुए अमित शाह ने फोन करके उनसे कहा था कि तीन विधानसभा बता दो, जहां से आप चुनाव लड़ना चाहते हो। बाद में निकाल दिया तो बहाना बनाने लगे कि हरक सिंह दो टिकट मांग रहा था, इसलिए निकाल दिया।  

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हरक सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
हरक सिंह रावत ने कहा कि भले वह राज्य बनने के बाद पहली बार सदन से बाहर हैं, लेकिन वह घर बैठने वाले व्यक्ति नहीं हैं। आगे उनकी क्या रणनीति रहेगी, इसका उन्होंने खुलासा तो नहीं किया, लेकिन कहा इस बार यह चैनल (कांग्रेस) लंबा चलेगा, पिछला चैनल (भाजपा) भी लंबा चलता, लेकिन वह भी क्या करते, उन्होंने पहले ही उन्हें बाहर निकाल दिया। 
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