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गुड न्यूज: सरकार के इस फैसले के बाद पेंशनर्स की हो जाएगी बल्ले-बल्ले, पढ़कर दिल खुश हो जाएगा

न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 13 Sep 2018 04:52 PM IST
पेंशन - फोटो : demo pics
पेंशनधारियों के लिए खुशखबरी है। सरकार के इस फैसले के बाद पेंशनर्स को बड़ा फायदा होने जा रहा है। उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर ही पेंशनर्स को लाभ देने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार उन एक लाख 10 हजार पेंशनरों की पेंशन व पारिवारिक पेंशन में बढ़ोत्तरी करेगी, जो वर्ष 2016 से पूर्व सेवानिवृत्त हुए हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद भी उन्हें यह लाभ अभी तक नहीं मिल रहा था। बुधवार को हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आए इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। 
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trivendra singh rawat
फैसले के अनुसार, केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश सरकार भी प्रदेश के ऐसे पेंशनरों के संशोधित वेतन मैट्रिक्स के अनुसार पेंशन लाभ देगी। फैसले के अनुसार, वित्त विभाग पेंशनरों की पेंशन व पारिवारिक पेंशन को पुनरीक्षित (रिवाइज) करेगा। इससे पेंशन में बढ़ोत्तरी हो सकेगी। एक लाख 10 हजार पेंशनरों को दिए जाने वाले इस लाभ से सरकारी खजाने पर हर महीने सात करोड़ रुपये का अतिरिक्त धनराशि खर्च होगी। 

पेंशन फंड
प्रदेश मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड सेवानिवृत्ति लाभ संशोधन विधेयक 2018 को विधानसभा सत्र के दौरान पुरा:स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। सरकार इस संबंध में पहले ही अध्यादेश ले आई थी। इसके तहत अधिनियम की धारा 7(1) में गलती से सेवानिवृत्ति उपदान की सीमा अंतिम आहरित मासिक की परिलब्धियों के साढ़े सोलह गुने के स्थान पर तैंतीस गुना टंकित हो गया था। इसमें संशोधन कर इसे साढ़े सोलह गुना कर दिया गया है।

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य
उत्तराखंड राष्ट्रीय बचत कार्यपालक सेवा के समूह क और ख के पदों के संबंध में राज्यपाल नियुक्ति प्राधिकारी होंगे। प्रदेश सरकार ने नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी गई। नियमावली में समूह ख के पदों के संबंध निदेशक को नियुक्ति प्राधिकारी निर्धारित किया गया था। 

pension
जबकि समूह ख के सहायक निदेशक पद पर पदोन्नति के लिए शासन स्तर पर विभागीय चयन समिति के गठन का प्रावधान है। इससे विरोधाभास पैदा हो रहा था। इसी तरह समूह ख के जिला बचत अधिकारी का सीधी भर्ती का पद है, जो लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा के माध्यम से भरा जाना है। यहां भी निदेशक को प्राधिकारी बनाया जाना उचित नहीं था। 
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