बाराहोती बॉर्डर
सूत्रों के अनुसार, 1958 में भारत और चीन ने बाराहोती के 80 वर्ग में फैले इस चारागाह क्षेत्र को विवादित क्षेत्र घोषित किया था। इसके बाद निर्णय लिया गया कि, यहां कोई भी अपने जवान नहीं भेजेगा। इसके बाद साल 2000 में यह फैसला लिया गया कि उत्तराखंड, हिमाचल और यूपी में तीन पोस्टों पर आईटीपीबी बिना हथियारों के ही पेट्रोलिंग करेगी। साथ ही वर्दी की बजाय जवान सिविलियन कपड़ों में रहेंगे। यही कारण है कि चीन बार बार यहां आकर अपना हक जताता है और घुसपैठ करता है।