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गांधी जयंती 2018: बापू को सबसे पहले इन्होंने दी थी 'महात्मा' की उपाधि, इस जगह से था खास लगाव 

Mon, 01 Oct 2018 07:40 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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gandhi ji in uttarakhand
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देशभर में आज़ादी की अलख जगाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा कैसे बुलाया जाने लगा क्या जानते हैं आप? नहीं तो यहां जानिए किसने सबसे पहले उन्हें महात्मा की उपाधि दी और उन्हें इस नाम से संबोधित किया। 
 
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gandhi ji in uttarakhand
महात्मा गांधी का उत्तराखंड से बेहद गहरा लगाव था। यहां बापू की आत्मा बसती थी। इस जगह से बापू की अनगिनत यादें जुड़ी हैं। नैनीताल, हल्द्वानी, देहरादून, मसूरी, कुमायूं, अल्मोड़ा सहित लगभग सभी हिस्सों में बापू ने आज़ादी की अलख जगाई थी। पहली बार महात्मा गांधी साल 1915 के अप्रैल महीने में कुम्भ के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश आए थे। 
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Gurukul kangri university
बापू यानी मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा नाम हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में मिला था। यह नाम उन्हें गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद ने दिया था। इस नाम से उन्हें सबसे पहले उन्होंने ही संबोधित किया था।

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gurukul kangri
जानकार बताते हैं कि जिस समय बापू अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे उस वक्त गुरुकुल के ही ब्रह्मचारियों ने गंगा का बांध बनाकर करीब 1500 रुपये इक्कठा कर उन्हें दिए थे। स्वामी श्रद्धानंद ने गांधी जी की सहायता के लिए अफ्रीका भेजी थी। 
 
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gandhi ji in uttarakhand
इसके बाद जब बापू पहली बार गुरुकुल कांगड़ी आए थे तो पहली मुलाकात में स्वामी श्रद्धानंद ने गांधी को महात्मा कहकर पुकारा था, जो हमेशा उनके नाम के साथ जुड़ गया। महात्मा गांधी अपने जीवनकाल में तीन बार गुरुकुल के मेहमान बने। पहली बार 1915 में, दूसरी बार 1916 और तीसरी बार 1926 में बापू गुरुकुल आए।
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