फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब एक झटके में 'गायब' हो गए थे पांच रहस्यमयी कुंड, आज तक नहीं खोज पाए वैज्ञानिक 

Thu, 15 Jun 2017 08:11 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 7
भारत के इस पव‌ित्र धाम में जब एक साथ एक झटके में पांच रहस्यमी कुंड गायब हो गए तो सब सोचने पर मजबूर हो गए क‌ि यह कैसे हुआ। लेक‌िन जब चार साल पहले ऐसा हुआ तो इसके बाद वैज्ञान‌िक भी इन्हें आज तक खोज नहीं पाए।



 
विज्ञापन

2 of 7
जी हां, यह बात हो रही है केदारनाथ धाम में बने पव‌ित्र कुंडों की। भगवान आशुतोष के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक केदारनाथ को पांच पर्वतों, पांच नदी धाराओं और पांच कुंडों की भूमि कहा जाता है। लेक‌िन, वर्ष 2013 में आई भीषण जलप्रलय में ये कुंड धवसत हो गए थे। आगामी 16 जून को आपदा को बीते हुए पूरे चार साल हो जाएंगे, लेक‌िन इनका पता अाज तक नहीं लग पाया।
विज्ञापन

3 of 7
hans kund
रेतस, हंस, उदक, अमृत और हवन कुंड जैसे पव‌ित्र और रहस्यों से भरे इन कुंडों में केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों की अस्‍था जुड़ी हुई है। काफी खोजबीन के बाद हालांक‌ि उदक और अमृत कुंड के कुछ अंश द‌िखाई द‌िए। लेक‌िन वे भी मूल स्वरूप में नहीं है। 

4 of 7
amarit kund
केदारनाथ मंदिर और प्राचीन कुंडों का आपस में सीधा संबंध हैं। केदारनाथ में हर कुंड की अपनी अलग महिमा है। रेतस कुंड के पास भगवान श‌िव का नाम जपने पर पानी में बुलबुले उठते थे। अमृत कुंड के पानी को लोग शुद्घता के ल‌िए प्रयोग करते थे।
विज्ञापन

5 of 7
amarit kund
उदक कुंड में श‌िवल‌िंग पर चढ़ाया जाने वाला जल एकत्रित होता था। ज‌िसे लोग प्रसाद के तौर पर लाते थे। वहीं हंस कुंड में लोग अपने प‌‌ित्रों का तर्पण करते थे।
विज्ञापन

6 of 7
most horrible photos of kedarnath disaster
लेक‌िन इस वर्ष शुरु हुई केदारनाथ यात्रा में श्रद्धालु अपने पितरों का तर्पण कुंडों में नहीं कर पा रहे हैं। श्रद्धालुओं को मंदाकिनी के किनारे ही तर्पण व कर्मकांड करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
most horrible photos of kedarnath disaster
बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी स‌िंह का कहना है क‌ि वाडिया संस्थान को केदारनाथ में आपदा से ध्वस्त हुए कुंडों के पुनरूद्धार के बारे में भू-गर्भीय सर्वेक्षण के लिए तीन बार पत्र लिखा, लेकिन संस्थान द्वारा पत्र का जवाब तक नहीं दिया गया। नमामि गंगे में कुंडों को विकसित करने लेकर समिति के पास कोई जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें