उत्तराखंड के चमोली जनपत स्थित एक गांव है द्रोणगिरि। यहां पर स्थित पर्वत के बारे में मान्यता है कि यह वही पर्वत है जिसे हनुमान जी संजीवनी बूटी के लिए उखाड़ ले गए थे।
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dronagiri parvat
रामायण की कथा के अनुसाल लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध में मेघनाद के वार से लक्ष्मण मूर्छित होकर युद्धस्थल में गिर गए थे। जिसके बाद सुषेन वैद्य को बुलाया गया।
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sanjeevani booti
सुषेन वैद्य ने लक्ष्मण की मूर्छा ठीक करने के लिए संजीवनी बूटी लाने को कहा। उन्होंने ही बताया कि यह बूटी द्रोणगिरि पर्वत पर पाई जाती है।
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संजीवनी की तलाश वैज्ञानिक
साथ ही यह शर्त भी थी कि लक्ष्मण की मूर्छा ठीक करने के लिए बूटी का प्रातःकाल से पहले पहुंचना जरूरी था।
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sanjeevani booti
चूंकि वहां पर सबसे तेज मारूति नंदन हनुमान जी ही थे इसलिए इसलिए संजीवनी बूटी लाने के लिए उन्हें ही भेजा गया।
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sanjeevani booti
संजीवनी बूटी लाने के लिए हनुमान जी द्रोणगिरि पर्वत पर पहुंच तो उन्हें भ्रम हो गया और वह बूटी पहचान ही नहीं पा रहे थे।
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dronagiri parvat
उधर रात बीत रही थी और सुबह तक बूटी का पहुंचना जरूरी था। अंत में हनुमान जी ने द्रोणगिरि पर्वत ही ले जाने की सोच ली।