जहां एक तरफ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लापता अमेरिकी ट्रैकर ढूंढने के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराया है, वहीं उत्तराखंड के मुखिया के पास लापता पोलैंड ट्रैकर की सुध लेने का समय भी नहीं है।
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बता दें कि शिवलिंग चोटी (6543 मीटर) पर फंसे पोलैंड के एक पर्वतारोही की मौत हो चुकी है और दूसरे पर्वतारोही को अभी तक रेक्स्यू करने में कामयाबी नहीं मिल पाई है। निम टीम के लौटने के बाद अब आर्मी और एसडीआरएफ ने वहां रेस्क्यू कार्य का मोर्चा संभाला हुआ है। वहीं एक पर्वतारोही लुकास्ज जॉन के शव को देर रात जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।
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हरीश रावत
- फोटो : file photo
कई दिनों से एक ट्रैकर लापता है, लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत को उसकी सुध लेने तक की खबर नहीं है। यहां तक की उन्होंने इस मामले का संज्ञान लेने तक की जरूरत नहीं समझी।
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virbhadra singh
हिमाचल में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने रविवार को कुल्लू में अमेरिका के 35 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं ट्रैकर जस्टिन एलेग्जेंडर शेल्टर के परिजनों से भेंट की। ट्रैकर जस्टिन एलेग्जेंडर शेल्टर पार्वती घाटी से लापता हैं। परिजनों के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने आधिकारिक हेलीकॉप्टर की सेवाएं प्रदान कीं, जिसने रविवार को सुबह भुंतर से लापता युवक की तलाश में उड़ान भरी। हेलीकॉप्टर में शेल्टर की माता, पारिवारिक मित्र जोनाथन और पुलिस की एक टीम खोज के लिए निकली। वीरभद्र्र सिंह ने आश्वासन दिया कि शेल्टर की खोज के लिए प्रदेश सरकार हरसंभव मदद प्रदान करेगी।
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dead body
बता दें कि उत्तराखंड स्थित शिवलिंग चोटी पर करीब 5300 मीटर की ऊंचाई से रेस्क्यू किए गए पोलैंड के पर्वतारोही के शव को देर रात बाई रोड उत्तरकाशी के जिला अस्पताल पहुंचाया गया। एसपी ददन पाल ने बताया कि मेडिकल की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव को दूतावास से आए प्रतिनिधियों के सुपुर्द किया जाएगा।
एसपी ने बताया कि दूसरा पर्वतारोही ग्रजेगुज माइकल के शिवलिंग चोटी पर फंसे होने की बात सामने आ रही है, जिसके रेस्क्यू के लिए टीम गई है। हालांकि अभी तक टीम को रेस्क्यू करने में सफलता नहीं मिल पाई है। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि रेस्क्यू टीम की ओर से कई बार प्रयास किया गया, लेकिन पर्वतारोही को चिह्नित नहीं कर पाए हैं। वहीं नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि उन्हें आर्मी की ओर से 5300 मीटर ऊंचाई पर फंसे लुकास्ज जॉन को रेस्क्यू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह हो गया। फिलहाल उन्हें दूसरा टास्क नहीं मिला है। अगर सरकार या आर्मी की तरफ से दूसरे पर्वतारोही को रेस्क्यू करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाती है, तो टीम वहां जाएगी।