देखरेख के अभाव में जर्जर होते जा रहा आश्रम
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आठ दिसंबर 2015 को पार्क प्रशासन ने इस कुटिया को देशी, विदेशी पर्यटकों के लिए खोल दिया। इसमें पार्क प्रशासन ने यहां देशी विदेशी पर्यटकों के लिए निर्धारित शुल्क लगा दिया। बीते पांच वर्षों में यह कुटिया पार्क प्रशासन के लिए मील का पत्थर साबित हुई। पार्क प्रशासन ने यहां से करोड़ों रुपये का राजस्व वसूला। वर्ष 2015 में 2.52, वर्ष 2016 में 18.89, वर्ष 2017 में 20.33, वर्ष 2018 में 50.51, वर्ष 2019 में 45.21, वर्ष 2020 से लेकर अब तक 24 लाख रुपये की आय हुई।