बदरीनाथ धाम के कपाट 15 मई(शुक्रवार) को तड़के चार बजकर 30 मिनट पर खोल दिए जाएंगे। लेकिन इस बार चारधाम यात्रा के शुरू होने पर बदरीनाथ धाम के इतिहास में दो बातें पहली बार हुई हैं। ये बातें भगवान बदरी विशाल के भक्तों को जरूर जाननी चाहिए।
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दरअसल, जब से चारधाम यात्रा शुरू हुई है तब से अब तक बदरीनाथ धाम के इतिहास में यह पहली बार होगा जब धाम में कपाट खुलने के समय वेद मंत्रों और जय बद्रीनाथ का जयघोष तो सुनाई देगा, लेकिन उनके भक्तों का हुजूम नहीं रहेगा।
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वहीं, बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि 30 अप्रैल तय की गई थी। लेकिन कोरोना संकट के कारण कपाट खोलने की तिथि को बदलकर 15 मई कर दिया गया। धाम के कपाट खोलने की तिथि भी इतिहास में पहली बार ही बदली गई है।
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चमोली नेहरु युवा केंद्र के जिला समन्वयक डा. योगेश धस्माना ने बताया कि वर्ष 1920 में स्वामी विवेकानंद सरस्वती हैजा रोग फैलने के कारण बदरीनाथ की तीर्थयात्रा पर नहीं जा पाए थे और कर्णप्रयाग से ही लौट गए थे। लेकिन तब यह संकट की स्थिति यात्रा के मध्य में आई थी।
बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि इस बार कपाट खुलने पर भक्तों की मौजूदगी नहीं रहेगी। धाम में पूजा के वक्त केवल 28 लोग ही मौजूद रहेंगे। वहीं सभी को मास्क लागना अनिवार्य होगा।