नदियों में खनन का काम भी कैशलेस होगा। वन विभाग और वन निगम ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। स्टोन क्रशर स्वामी कैशलेस व्यवस्था को लागू करने पर सहमत हैं। इसको लेकर पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक कार्यालय में संयुक्त मीटिंग भी हुई है। नए साल से सिस्टम लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
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वन निगम गौला, कोसी, शारदा, दाबका, नंधौर आदि नदियों में खनन कराता है। वन निगम, वन विभाग एक डंपर का प्रतिदिन करीब 4000 रुपए राजस्व लेता है। यह राशि अभी तक खनन गेटों पर कैश जमा होती थी। नोटबंदी के चलते खनन व्यवसायियों के लिए करेंसी जुटाना मुश्किल हो रहा है। खनन का काम भी प्रभावित हो रहा है।
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इसके मद्देनजर वन विभाग, वन निगम ने खनन गेटों पर कैशलेस सिस्टम को लागू करने की योजना बनाई है। इसको लेकर पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक कार्यालय में वन, वन निगम, बैंक और स्टोन क्रशर स्वामियों की मीटिंग हुई। वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि 25 नवंबर को देहरादून में वन निगम के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में कैशलेस सिस्टम को लागू करने को कहा गया था।
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इसी क्रम में मंगलवार को मीटिंग बुलाई गई। स्टोन क्रशर स्वामी भी कैशलेस सिस्टम को लागू करने पर सहमत हैं। खनन गेटों पर स्वाइप मशीनों को लगाया जाएगा। इसके लिए बैंक के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई है। उम्मीद है कि नए साल में गौला में कोसी, दाबका, शारदा के खनन गेटों पर कैशलेस सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा।
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इससे गेटों पर कैश की सुरक्षा को लेकर जो खतरा बना रहता है, वह भी दूर हो जाएगा। मीटिंग में डीएफओ तराई पश्चिमी वन प्रभाग कहकशां नसीम, हल्द्वानी वन प्रभाग के डॉ. चंद्रशेखर सनवाल, डीएलएम गौला बीडी हर्बोला, डीएलएम अनिल श्रीवास्तव समेत वनाधिकारी मौजूद थे।
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वनाधिकारियों के अनुसार डंपर स्वामी को एक कार्ड लेकर खनन गेट में जाना होगा। इसमें दस हजार तक की लिमिट होगी। दिन में एक बार ही कार्ड को स्वाइप किया जा सकेगा। इसके अलावा खनन गेटों पर स्वाइप मशीनें बैकअप के तौर पर भी रखी जाएंगी, जिससे कोई तकनीकी अड़चन आने पर समस्या को दूर किया जा सके।
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गौला के 11 गेटों से खनन होता है। इसमें ई-रवन्ना व्यवस्था आदि को लागू करने में एक वाहन पर पांच मिनट का समय लग रहा है, जबकि पूर्व व्यवस्था में दो मिनट का समय लगता था। गेटों पर सैकड़ों वाहन पंजीकृत हैं। ऐसे में समय ज्यादा लगने पर सभी वाहनों की गेट से प्रवेश और निकासी मिलना मुश्किल है। भविष्य में एक ही जगह दो गेटों की व्यवस्था करने या वन कर्मियों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे सुव्यवस्थित तरीके से खनन कराया जा सके।
पिछले साल खनन गेटों पर कैशलेस सिस्टम को लागू करने की योजना बनी थी। जिला खनन समिति की मीटिंग के बाद इसे लागू करने का आदेश भी हो गया था। बैंकों आदि से बातचीत भी हो गई थी। पर खनन से जुड़े लोगों ने इसमें व्यवहारिक दिक्कतें बताई थी, जिसके बाद इसे लागू नहीं किया जा सका। अब नोटबंदी के बाद इसको लागू करने पर खनन व्यवसायी सहमत हो गए हैं।