विशिष्ट संस्कृति के लिए प्रसिद्ध जौनसार बावर में बृहस्पतिवार को बिस्सू पर्व का विधिवत शुभारंभ हुआ। मंदिरों में देव दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लोगों ने देवताओं को बुरांश के फूल अर्पण कर सुख और समृद्धि की कामना की।
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क्षेत्र के गांवों में फूलियात की धूम रही। लोगों ने पंचायती आंगन में एकत्र होकर ढोल एवं दमाऊ की थाप पर पारंपरिक अंदाज में नृत्य किया और एक दूसरे को बिस्सू की बधाई दी। वहीं 16 अप्रैल को चकराता के निकट स्थित ठाणा डांडा में गनियात पर्व के मौके पर बिस्सू मेले का आयोजन किया जाएगा।
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संवाई, पानुवा, कनबुआ, जिसऊ घराना, लोहारी, हनोल, भरम, बावर समेत कई गांवों में बिस्सू पर्व का प्रथम दिन फूलियात के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बिस्सू को लेकर गांवों के मंदिरों में सुबह से ही लोगों की भीड़ लगी रही।
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कनबुआ, समोग, डिमऊ, बमराड़ में जहां शिलगुर देवता की पालकी निकाली गई, वहीं संवाई में महासू देवता की पालकी को कंधा देने के लिए लोग आतुर दिखे। अलसी, भंजरा, जिसऊ घराना, कोटी विशाइल, कोरुवा, हयो में देव छड़ी के दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।
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बिस्सू पर्व पर लोहारी गांव में पारंपरिक अंदाज में ठोउड़ा (तीरंदाजी) का खेल खेला गया और जुड्डो नृत्य किया गया। घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए गए। लोगों ने चावल के आटे के पापड़ और पूड़ी समेत कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
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लाछा और बिसोई गांव में धूमधाम से गोगा वीर का पूजन किया गया। लोगों ने देवता की शिला पर बुरांश समेत 14 प्रकार के पुष्प अर्पित कर मन्नतें मांगीं। पूजन में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने शिरकत की। सुबह गांव के युवाओं ने जंगल में जाकर बुरांश के पुष्प एकत्र किए। ग्रामीणों ने गोगा वीर की शिला पर पुष्प अर्पित कर पूजा अर्चना की।
16 अप्रैल को चकराता के निकट स्थित ठाणा डांडा में गनियात पर्व के मौके पर बिस्सू मेले का आयोजन किया जाएगा। जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग उमड़ेंगे। मेले को देखने के लिए हिमाचल प्रदेश के साथ ही पड़ोसी जिले उत्तरकाशी और टिहरी से भी लोग पहुंचते हैं।