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कभी कपड़े सिलकर 5 रुपये कमाती थीं, आज मिला पद्मभूषण सम्मान, पढ़िए संघर्ष से भरी कहानी

Sun, 27 Jan 2019 10:02 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली उत्तराखंड की बेटी बछेंद्री पाल को पद्मभूषण सम्मान से नवाजा गया है। बछेंद्री पाल भारत की पहली और दुनिया की पांचवी महिला हैं जिसने माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल की है। तो चलिए हम आपको इस बहादुर बेटी के जीवन के कुछ अनछुए पल के बारे में बताते हैं।

 
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bachendri pal - फोटो : amarujala
23 मई, 1984 के दिन बछेंद्री उंट एवरेस्ट पर चढ़कर तिरंगा फहराया था। बछेंद्री उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की रहने वाली हैं। इनका जन्म 24 मई, 1952 में हुआ था। बछेंद्री पाल ने अपनी जिन्दगी में बहुत से उतार चढ़ाव देखे हैं। पर्वतारोही बछेंद्री पाल का जन्म उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नकुरी गांव में वर्ष 1954 में हुआ था। किसान परिवार में जन्म लेने वाली पाल ने किसी तरह बीएड तक की पढ़ाई पूरी, लेकिन प्रतिभाशाली और होनहार होने के बावजूद उन्हें कोई अच्छा रोजगार नहीं मिला।
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bachendri pal
बछेंद्री पाल के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण वे लोगों के कपड़े सिलती थीं। जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो उन्होंने सिलाई सीख ली और सलवार-कमीज़ सिलना शुरू कर दिया। सिलाई करके उन्हें 5-6 रुपए रोज़ के मिल जाते थे। जिससे उनका खर्च निकल आता था. स्कूल टाइम में बछेंद्री न सिर्फ पढ़ने में ही नहीं, बल्कि खेल-कूद में भी बहुत आगे रहती थी।

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bachendri pal
बता दें कि बछेंद्री माउंटनियरिंग में यूं ही नहीं आयी। इसके पीछे भी एक कहानी है। बी.ए. के करने के बाद बछेन्द्री ने एम.ए. (संस्कृत) किया और फिर बी.एड. की डिग्री हासिल की। इतनी पढ़ाई करने के बाद भी बछेंद्री को कहीं अच्छी नौकरी नहीं मिली। जहां भी नौकरी मिलने की बात होती, वहां उन्हें कम तनख्वाह वाली जूनियर लेवल की नौकरी की ऑफर दी जाती। इसलिए उन्होंने ज्वाइन नहीं किया क्योंकि बछेंद्री को लगा कि ये उनकी ज्यादा पढ़ाई की तौहीन है। इसके बाद बछेंद्री ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिले के लिए आवेदन कर दिय। 
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- फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि बछेंद्री बचपन में बहुत शरारती रही हैं। स्कूल टाइम में इनकी एक टीचर थीं, जो बहुत सुंदर थीं। बछेंद्री और इनकी सहेलियां ये सोचती थी कि उनकी टीचर इतनी सुंदर कैसे हो सकती हैं। उनकी सुंदरता का राज़ जानने के लिए एक दिन वो अपने दो दोस्तों के साथ स्कूल से भागकर खिड़की से उनके कमरे में घुस गईं। वो ड्रेसिंग टेबल पर देखने लगीं कि बोतलों में क्या-क्या रखा है। इस बात का पता उनकी मैम को चल गया और बछेंद्री की जम के धुनाई हुई।
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बछेंद्री पाल
बछेंद्री का कहना है कि पद्मभूषण मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है, लेकिन मैं किसी सम्मान के लिए काम नहीं करती। मेरी पहली प्राथमिकता महिला सशक्तीकरण है और मैं जीवनभर इस काम में जुटी रहूंगी। यह कहना है पर्वतारोही बछेंद्री पाल का। इसके पहले उन्हें पद्मश्री समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। उत्तरकाशी में जन्मीं बछेंद्री पाल फिलहाल जमेशदपुर स्थित टाटा स्टील में बतौर ट्रेनर काम कर रही हैं। उनका कहना है कि भले ही इस समय वह बाहर हैं, लेकिन उत्तराखंड के प्रति उनका प्यार कभी कम नहीं होगा।
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शुक्रवार रात पद्मभूषण पुरस्कार के लिए पर्वतारोही बछेंद्री पाल का सामने आया तो फोन पर अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने खुशी का इजहार किया। उनका कहना है कि महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से वे साढ़े चार हजार बालिकाओं को लीडरशीप ट्रेनिंग दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1993 में एवरेस्ट पर गए दल ने पर्वतारोहण के दौरान छह विश्व रिकॉर्ड बनाए थे। उस अभियान की इस साल सिल्वर जुबली मनाई जा रही है। इसके तहत अप्रैल में बालिकाओं को एवरेस्ट के बेस कैंप ले जाया जाएगा। 
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पुरस्कार और सम्मान 
- पद्मश्री पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, नेशनल एडवेंचर अवार्ड 
- भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन से पर्वतारोहण में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक 
- संस्कृति मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से वीरांगना लक्ष्मीबाई सम्मान
- कोलकाता लेडिज स्टडी ग्रुप अवार्ड, उत्तर प्रदेश सरकार का यश भारती सम्मान 
- हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पीएचडी की मानद उपाधि 
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