केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की की ओर से अयोध्या में बनाए जा रहे श्रीराम मंदिर के भवन का डिजाइन ऐसी खास कला और तकनीक के इस्तेमाल से तैयार किया गया है, जिससे कम से एक हजार साल तक इसका बाल भी बांका नहीं हो सकेगा। पूरे भवन की प्रतिपल हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए नींव, कॉलम और रिटेनिंग वॉल में सेंसर लगाए गए हैं। मंदिर के विशालकाय भवन की खासियत यह भी है कि इसमें कहीं भी सरिया नहीं लगा है।
सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार ने बताया कि मंदिर के डिजाइन में तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति का भी समावेश किया गया है। मंदिर में रामलला की प्रदक्षिणा के साथ ही पांच जगह से प्रवेश किया जा सकता है। वैज्ञानिक डाॅ. देवदत्त घोष ने बताया कि शुरुआत में अहमदाबाद की एक कंपनी ने संस्थान को श्रीराम मंदिर का मॉडल सौंपा था जिसका अध्ययन किया गया।
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उन्होंने कहा कि बिना सरियों के इस्तेमाल के मंदिर का आकार डिजाइन के लिहाज से चुनौती था। इसके चलते टेस्टिंग और कंप्यूटर में मॉडलिंग करने के बाद डिजाइन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। कई स्थानों पर बड़े कॉलम के साथ दो छोटे-छोटे कॉलम दिए गए। फाइनल डिजाइन से पहले कंप्यूटर पर 50 मॉडल तैयार किए गए जिसमें छह माह का समय लगा। पूरे भवन में कोई सरिया नहीं लगा है। यहां तक की सीढि़यों में भी सरिया नहीं लगा है। मंदिर की ऊंचाई 161 फीट है। पूरे मंदिर में कॉलम को एक के ऊपर एक पत्थर को रखकर इंटरलॉकिंग सिस्टम से निर्मित किया गया है। बीम में एक ही पत्थर का इस्तेमाल किया गया है।