फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलवामा आतंकी हमले के बाद फौजी अफसरों की माताओं ने सरकार से की ये मांग, कहा अब हमें दें मौका

Thu, 21 Feb 2019 08:23 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 6
major vibhuti dhondiyal
सरकार हमें मौका दे। हम आतंकियों को प्यार से समझाएंगे। जैसे उनके बच्चे हैं, वैसे ही हमारे भी बेटे हैं। यह खून-खराबा कब तक चलेगा। शहीद मेजर विभूति को गोद में खिलाने वाली शोभा जोशी इस शहादत से बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि जब किसी मां की कोख उजड़ती है तो इससे दुखद कुछ नहीं हो सकता।
 
विज्ञापन

2 of 6
major vibhuti dhondiyal
शोभा जोशी डिफेंस कालोनी मेें रहती हैं। उनका एक बेटा गिरित्र जोशी ले. कर्नल है। शहीद मेजर विभूति शंकर के घर पहुंचकर उनके जेहन में विभूति की बचपन की यादें ताजा हो गई। जब विभूति छोटा सा था तो इस आंगन में वह किराएदार थीं। विभूति की शरारतें दिल को लुभाती थीं। उनका बेटा भी विभूति के साथ खूब खेलता था। वह विभूति को गोद में खिलाती थी।
विज्ञापन

3 of 6
major vibhuti dhondiyal
जिस आंगन में विभूति को खेलते, शरारतें करते देखा, आज उसी आंगन से उसे विदा होता देखकर शोभा की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह बोले जा रही थी, हमारे बच्चे...आखिर कब तक? फिर सवाल किया, कब तक चलेगा यह खून-खराबा?
 

4 of 6
major vibhuti dhondiyal
उनकी निगाहें अमर उजाला संवाददाता की ओर थी। फिर बोली, तुम भी मेरे बेटे हो। जो गया है, वह भी मेरा बेटा था। एक बेटा फौज में लेफ्टिनेंट कर्नल है। हमारे बेटे लगातार शहीद हो रहे हैं। क्यों न सरकार हमें कश्मीर भेजे? उनकी यह बात सकपकाने वाली थी। आसपास खड़े लोग उनकी बात को समझने की कोशिश कर ही रहे थे कि वह फिर बोली...बेटा, हम कश्मीर जाएंगे। सभी फौजियों की मां कश्मीर जाएंगी।

 
विज्ञापन

5 of 6
major vibhuti dhondiyal
उन्हें समझाएंगी। जिस तरह वह किसी मां के बेटे हैं, उसी तरह हमारे भी बेटे हैं। हम नहीं चाहते किसी भी मां की कोख उजड़े। हम आतंकियों को मोहब्बत, मां के लहजे में समझाएंगे। हो सकता है कि उन्हें हमारी बात पसंद आ जाए और वह खून-खराबा छोड़कर अमन की राह पर चल पड़ें।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
major vibhuti dhondiyal
बड़ी मन्नतों के बाद मिला था विभूति
शहीद मेजर विभूति की बुआ विमला शर्मा की आंखे रो-रोकर लाल हो गई हैं। कोई दिलासा देने आता है तो आंसू खुद-ब-खुद गालों तक फिसल जाते हैं। हाथ से आंसू हटाती हुई बोली...कितनी मन्नतों के बाद मिला था विभू। तीन बेटियां हो गई थी। इसके बाद मिला था विभू।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें