रिंकू को बधाई देते साथी खिलाड़ी
- फोटो : IPL/BCCI
पिता नहीं चाहते थे कि क्रिकेटर बने रिंकू
रिंकू बताते हैं- मेरे पिताजी मुझे क्रिकेट खेलता हुआ नहीं देखना चाहते थे। वह नहीं चाहते थे मैं अपना समय क्रिकेट पर बर्बाद करूं। कभी-कभी जिद्द में मेरी पिटाई भी हो जाती थी। खेलकर जब मैं घर लौटता था तो पिताजी छड़ी लेकर तैनात रहते थे। हालांकि, मेरे भाइयों ने मेरा साथ दिया और मुझे क्रिकेट खेलने के लिए कहता था। मेरे पास तब गेंद खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। कुछ लोगों ने इसमें भी मेरी मदद की।
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इसके बाद रिंकू घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट्स खेलने लगे। एक बार उन्हें इनाम में एक मोटरसाइकिल मिली और इसे रिंकू ने अपने पिता को गिफ्ट में दे दी। दरअसल, 2012 में रिंकू के स्कूल वालों ने एक वर्ल्ड कप कराया, जिसमें पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमें खेलने आईं। इस टूर्नामेंट में रिंकू ने 354 रन बनाए थे और आठ विकेट झटके थे। इसके लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड मिला था और एक मोटरसाइकिल मिली थी।
उस दिन रिंकू के माता-पिता मैदान पर ही मौजूद थे। उस दिन से पहले तक रिंकू जब भी क्रिकेट खेलते थे तो उनके पिता उन्हें पीटते थे, लेकिन उस मैच के बाद पिता ने कभी रिंकू को हाथ तक नहीं लगाया। इन सब के बावजूद रिंकू का परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। साथ ही रिंकू को क्रिकेट जारी रखने के लिए पैसे की जरूरत थी।