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Bishan Singh Bedi: कपड़े धोकर अंगुलियां मजबूत बनाईं और फिर विकेट की झड़ी लगा दी; पढ़ें बिशन सिंह बेदी की कहानी

Mon, 23 Oct 2023 04:16 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बेदी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज 1966 में वेस्टइंडीज के खिलाफ किया था। वह करीब 12 साल तक भारत के लिए खेले। इस दौरान उन्होंने अपनी गेंदबाजी ही नहीं बतौर कप्तान भी खूब नाम कमाया।
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : अमर उजाला
भारतीय टीम का वह स्पिन गेंदबाज जो अपनी एक ही गेंदबाजी एक्शन से चार तरह की गेंदें फेंक लिया करता था। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्पिनर कहे जाने वाले शेन वॉर्न भी उन्हें अपने आदर्श मानते थे। 1970 के दशक में टीम इंडिया की स्पिन की जान कहलाने वाले जादुई स्पिनर और पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी का 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। 
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
बेदी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज 1966 में वेस्टइंडीज के खिलाफ किया था। वह करीब 12 साल तक भारत के लिए खेले। इस दौरान उन्होंने अपनी गेंदबाजी ही नहीं बतौर कप्तान भी खूब नाम कमाया। 67 टेस्ट मैच उनके नाम 266 विकेट दर्ज हैं। उन्होंने 22 टेस्ट मैच में भारतीय टीम की कमान भी संभाली। बिशन सिंह बेदी ने अपना प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर 1560 विकेट के साथ समाप्त किया था, जो कि एक रिकॉर्ड है।
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
द टेलीग्राफ में लिखे अपने आर्टिकल में रामचंद्रा गुहा ने बताया था कि बेदी ने पहली बार टेस्ट मैच तभी देखा, जब उन्होंने अपन टेस्ट डेब्यू किया था। इससे पहले उन्होंने टेस्ट मैच कभी नहीं देखा था। बिशन सिंह बेदी के कई किस्से मशहूर हैं। आइए जानते हैं...

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बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
बात साल 1989-90 की है। उस समय बेदी न्यूजीलैंड दौरे पर बतौर टीम इंडिया के मैनेजर बनकर गए थे। जहां रॉथमैंस कप में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया से हार झेलनी पड़ी थी। इस हार के बाद बेदी टीम इंडिया पर बेहद ही गुस्सा थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि पूरी टीम इंडिया को प्रशांत महासागर में डुबो देना चाहिए। 1990 में भारतीय टीम वापस भारत लौट रही थी। उन्होंने उस वक्त पूरी टीम इंडिया को समंदर में फेंकने की धमकी दी थी।
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
बेदी ने एक बार किसी इंटरव्यू में कहा था कि उनकी गेंदबाजी की ताकत उनकी अंगुलियां थीं। यही वजह है कि वह अपनी अंगुलियों को मजबूत बनाने और कलाई को लचीला बनाने के लिए अपने कपड़े खुद धोया करते थे। इससे उनकी अंगुलियों को ताकत मिलती और गेंद को अंगुलियों में फंसाकर घुमाना आसान होता जाता था।
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विराट कोहली और बिशन सिंह बेदी - फोटो : PTI
साल 1978 में पाकिस्तान के साहिवाल में बेदी के गुस्से की वजह से टीम इंडिया को हार झेलनी पड़ी थी। दरअसल मैच में भारत को जीत के लिए 18 गेंदों में 23 रन बनाने थे और उसके आठ विकेट बचे हुए थे। इस मैच में पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सरफराज नवाज ने लागातर चार बाउंसर फेंकी और किसी भी गेंद को अंपायर ने वाइड नहीं दिया। यह देख बेदी भड़क गए और उन्होंने अपने बल्लेबाजों को मैदान से वापस बुला लिया। बेदी के इस फैसले के बाद पाकिस्तान यह मैच जीत गया। इसे लेकर बेदी की काफी आलोचना भी तब हुई थी।
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : getty
बिशन सिंह बेदी जैसा खिलाड़ी परिश्रम, साधना और पक्के इरादे से मिलकर बनता है। उनके बारे में तो यह तक कहा जाता है कि वह होटल या रेस्तरां में जाकर खाना खाने वालों में से नहीं थे और न ही किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहते थे। उन्हें घर का बना खाना ही रास आता था।

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बिशन सिंह बेदी - फोटो : getty
बेदी ने घरेलू क्रिकेट से अपने खेल की शुरुआती की थी। उत्तरी पंजाब के लिए पहली बार तब खेला था जब वह केवल 15 साल के थे। 1968–69 में वह दिल्ली की तरफ से खेलने लगे थे और 1974–75 सत्र में उन्होंने रणजी ट्राफी में रिकॉर्ड 64 विकेट लिए थे। बेदी गेंद को फ्लाइट कराने में लाजवाब थे। बेदी पूरे दिन लय और संतुलन के साथ गेंदबाजी कर सकते थे। वह बेजान पिचों पर भी गेंद को घुमाने की क्षमता रखते थे।

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बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
बेदी की कप्तानी में दिल्ली 1976-77 में रणजी ट्रॉफी की उप विजेता और 1978-79 में चैंपियन बनकर उभरी। टीम अगले सत्र में फिर चैंपियन बनी। दिल्ली की टीम मुंबई और कर्नाटक जैसी टीमों को हराने लगी। ऐसे में दिल्ली भारतीय क्रिकेट में मुंबई और कर्नाटक के बाद एक तीसरी शक्ति के रूप में उभरा। 

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बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
भारत के कप्तान के रूप में बेदी के खाते में कुछ बड़ी कामयाबियां और विवाद भी रहे। वे उस भारतीय टीम के कप्तान थे जिसने वेस्टइंडीज के विरुद्ध 1976 में पोर्ट ऑफ स्पेन में ऐतिहासिक टेस्ट जीता था। तब भारतीय बल्लेबाजों ने चौथी पारी में 400 से अधिक रनों के लक्ष्य का पीछा किया था।

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बिशन बेदी और जॉन लीवर - फोटो : सोशल मीडिया
बेदी ने 1976-77 में भारत आई इंग्लैंड टीम के तेज गेंदबाज जॉन लीवर पर बॉल टेम्परिंग का आरोप लगा था। उनपर अवैध तरीके से गेंद को वैसलीन से पॉलिश करने का दोषी बताया था। इस आरोप के बाद क्रिकेट जगत में खूब बवाल हुआ था। जॉन लीवर नए गेंदबाज थे और दिल्ली में टेस्ट डेब्यू किया था। उनकी गेंद को गजब का स्विंग मिला और भारत के बल्लेबाज हैरान थे। दिल्ली और कोलकाता में शुरुआती दो टेस्ट में उन्होंने 12 विकेट झटके। इसके बाद मद्रास में तीसरे टेस्ट में उन्होंने सात विकेट झटके। तीनों टेस्ट इंग्लैंड ने जीते। लीवर के विकेट लेने से हड़कंप मच गया। 

मद्रास टेस्ट के बाद बिशन सिंह बेदी ने लीवर और बॉब विलिस पर बॉल टेम्परिंग का आरोप लगाया था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार इस तरह का आरोप लगा था और पूरी क्रिकेट की दुनिया में इस पर सनसनी फैल गई थी। इंग्लैंड ने आरोप को गलत बताया। उस मैच में अंपायरिंग कर रहे रुबेन ने कहा था- मैंने गेंदबाजी रन-अप पर एक पट्टी पड़ी देखी, उठाया तो देखा कि उस पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगा था। जब इस बारे में टोनी ग्रेग को बताया तो वह बोले कि यह वैसलीन है।

जो पट्टी अंपायर रुबेन ने उठाई थी, उसे जांच के लिए मद्रास की एक फोरेंसिक लैब को भेज दिया। लैब की रिपोर्ट आज तक किसी के सामने नहीं आई। कई साल बाद अंपायर रुबेन ने एक इंटरव्यू में कहा था- मैं मानता हूं कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन हुआ। हम इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे। हालांकि, बिशन सिंह बेदी की मुखर आवाज ने ही दुनिया को यह भी बताया कि बॉल टेम्परिंग भी कोई चीज होती है।
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया
बेदी ने भारत के लिए 67 टेस्ट और 10 वनडे खेले। टेस्ट में उनके नाम 266 विकेट और वनडे में सात विकेट लिए। टेस्ट में 98 रन देकर सात विकेट और वनडे में 44 रन देकर दो विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी रही। 370 प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैचों में उन्होंने 1560 विकेट और 72 लिस्ट-ए मैचों में 71 विकेट लिए। टेस्ट में उन्होंने 656 रन बनाए और नाबाद 50 रन उनका सर्वश्रेष्ठ रहा।
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