भगवान शंकर ने यहां दिए थे मंदोदरी को वरदान, प्रतिदिन आती थी पूजा करने
Wed, 22 Feb 2017 08:41 PM IST
मनु चौधरी, अमर उजाला ब्यूरो
सार
- रावण की पत्नी मंदोदरी सखियों संग प्रतिदिन यहां आती थी पूजा करने
- हजारों साल पुराना है मेरठ में स्थति श्री बिल्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर
- सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करने पर हर मनोकामना होती है पूरी
सुनने और पढ़ने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह हकीकत है। ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने मंदोदरी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें इस मंदिर में दर्शन दिए और वरदान मांगने के लिए कहा था।
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- फोटो : मनु चौधरी
मेरठ में सदर स्थित श्री बिल्वेश्वर नाथ शिव मंदिर में त्रेता युग में रावण की पत्नी मंदोदरी भगवान शिव की पूजा करने के लिए अपनी सखियों के साथ प्रतिदिन यहां आती थी।
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- फोटो : मनु चौधरी
मंदोदरी ने भगवान भोलेनाथ से इच्छा जताई कि उसका पति धरती पर सबसे बड़ा विद्वान और शक्तिशाली हो। भोलेनाथ की कृपा से यहीं पर रावण और मंदोदरी का मिलन हुआ तथा मंदोदरी को पति के रूप में रावण की प्राप्ति हुई। तभी से इस मंदिर को भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त है। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से इस मंदिर में भोलेनाथ की पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
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- फोटो : मनु चौधरी
पिछले तीस सालों से मंदिर में पूजा कर रहे पुजारी आचार्य पं. हरीशचंद जोशी बताते हैं कि मंदिर की विशेषता यह है कि यहां बिना शीश झुकाये आप अंदर प्रवेश नहीं कर सकते। शिवलिंग में जल चढ़ाने के लिए शीश झुकाकर ही अंदर प्रवेश होता है। इस समय सुधा स्वामी मंदिर की संरक्षक हैं।
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- फोटो : मनु चौधरी
हर शिवरात्रि पर लाखों कांवड़ियें यहां पर मंदिर के शिवलिंग पर जल चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं। हर सोमवार को काफी भीड़ लगती है। जब भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है तो वह शिव पार्वती की पोशाक चढ़ाने के बाद भंडारे का आयोजन करते हैं।
मंदिर के संक्षिप्त परिचय की बात करें तो मेरठ का प्राचीन नाम मयदन्त का खेड़ा था। यह मय दानव की राजधानी थी, पूर्व में मय दानव की एक पुत्री थी। जिसका नाम मंदोदरी था उसका विवाह रावण के साथ हुआ था। मंदोदरी यहां पूजा के लिए आया करती थीं, जनश्रुति के अनुसार जहां आज भैंसाली का मैदान है वहां पर राजा मय के समय में सती सरोवर था। जिसमें मन्दोदरी स्नान करके पश्चिम टट पर स्थित बिल्वेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आया करती थी। इस ऐतिहासिक मंदिर में आज भी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती हैं।