हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने खट्टर सरकार का पहला 'मनोहर' बजट पेश कर दिया। तस्वीरों में देखिए, क्या निकला उनके पिटारे से।
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वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने राज्य की जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया है, लेकिन उन्होंने कोई खास टैक्स कटौती भी नहीं की है। महज चार चीजों में वैट से छूट देकर किनारा कर लिया है। बिजली आपूर्ति को बढ़ाने के लिए पुरानी और अक्षम इकाइयों को बंद करके, उनकी जगह पानीपत में 800 मेगावाट का सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है।
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इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग कल्याण, ग्रामीण विकास, शहरी स्थानीय निकाय और श्रम एवं रोजगार केलिए 27,291 करोड़ की राशि आबंटित की है। सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए भी 1193 करोड़ राशि के आबंटन का प्रावधान किया है।
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कैप्टन अभिमन्यु ने कहा है कि राज्य के विकास में क्षेत्रीय असमानताएं साफ तौर पर दिखाई देती हैं। राज्य संसाधनों के विषम आवंटन और असंतुलित औद्योगिक निवेश, रोजगार के असमान अवसरों और प्रतिव्यक्ति आय से संबंधित आंकड़ों से यह स्पष्ट है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी इससे संबंधित एक चुनौती है।
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वित्त मंत्री ने 9,557 करोड़ 52 लाख रुपये के संभावित राजस्व घाटे का बजट पेश किया है, जबकि पूर्व की हुड्डा सरकार ने अंतिम बजट 9499 का पेश किया था। यह दावा भी किया था कि 31 मार्च 2015 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष में इस घाटे को कम किया जाएगा।
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खजाना खाली होने के बावजूद भाजपा ने प्लान बजट में 1278 करोड़ 7 लाख रुपये की बढ़ोतरी की है। हुड्डा सरकार ने 2014-15 में अपना आखिरी प्लान बजट 32 हजार 731 करोड़ 29 लाख रुपये का पेश किया था। इसके मुकाबले खट्टर सरकार ने 34 हजार 9 करोड़ 35 लाख रुपये का प्लान बजट पेश किया है।
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बजट में विभागों के लिए कुल 25 हजार 743 करोड़ 46 लाख रुपये की योजना है, जबकि राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए 7 हजार 467 करोड़ 50 लाख रुपये और शहरी स्थानीय निकायों के लिए 798 करोड़ 39 लाख रुपये का बजट भी शामिल है। प्रदेश सरकार के कुल बजट में 5 हजार 106 करोड़ 21 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है।
बजट से पहले दो श्वेत पत्र जारी कर चुकी भाजपा सरकार ने पुरानी सरकारों को कर्ज लेने के मामले में कटघरे में खड़ा किया था, लेकिन वर्तमान सरकार भी इससे अछूती नहीं रहेगी। 2014-15 में (स्टेट डेब्ट लॉयबिलिटी) कर्ज 81,836 करोड़ है, जो कि 2015-16 में 98,843 करोड़ दिखाया गया है।