बलूचिस्तान पर यूरोपीय संघ के बयान के बाद बलूच नेता मजदक दिलशाद ने आजादी की जंग तेज कर दी है। शनिवार को उन्होंने बागपत में बलूच संस्कृति के गांव तिलपनी और बिलोचपुरा पहुंचकर लोगों से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पूरी दुनिया में आतंक फैला रहा है।
पूरी दुनिया में हिंदुस्तान ही अब बलूचिस्तान के लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद रह गया
baloch
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के उड़ी में भारत के 18 सैनिकों की मौत इसका ताजा उदाहरण है। पूरी दुनिया में हिंदुस्तान ही अब बलूचिस्तान के लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद रह गया है। हम सत्तर साल से आजादी की जंग लड़ रहे हैं, यह जारी रहेगी। उन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया। कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर में सेना वहां के नागरिकों पर जुल्म ढा रही है।
मदद के लिए भारत के मुस्लिमों के अलावा हिंदुओं से भी समर्थन मांग रहे
baloch
- फोटो : अमर उजाला
मजदक शनिवार को पहले बड़ौत के शहजाद राय शोध संस्थान में पहुंचे। संस्थान के निदेशक अमित राय जैन के साथ वह बिलोचपुरा गांव में पहुंचे। यहां लोगों को बलूचिस्तान में ढाए जा रहे जुल्म के बारे में बताया। उन्होंने लोगों से समर्थन मांगा, साथ ही यह भी जोड़ा कि उनकी मुहिम केवल बलूच लोगों से समर्थन मांगने तक सीमित नहीं है। वह मदद के लिए भारत के मुस्लिमों के अलावा हिंदुओं से भी समर्थन मांग रहे हैं। आजादी की जंग बलूच संस्कृति और पुरखों की यादों पर बातचीत की गई।
न्याय की जंग के लिए पूरी दुनिया से मांगा जा रहा है समर्थन
baloch
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद वह इसी संस्कृति के बताए जाने वाले दूसरे गांव तिलपनी पहुंचे। यहां प्रधान सन्ना उल्ला खां के घर में ग्रामीणों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोगों को न्याय की जंग के लिए पूरी दुनिया से समर्थन मांगा जा रहा है, लेकिन यहां आकर अपनापन लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से उन्हें सहारा मिला है।
कौन है मजदक दिलशाद
baloch
- फोटो : अमर उजाला
बलूचिस्तान की आजादी की जंग लड़ रहे लोगों में मजदक दिलशाद भी एक हैं। उनके पिता मीर मुस्तफा रासानी पेशे से फिल्मकार थे। माता नायला कादरी लेखिका और एनजीओ से जुड़ी हैं। इनके पिता को पाकिस्तान की सेना ने कैद में डाल दिया। रिहाई के बाद यह परिवार वर्ष 2010 में अफगानिस्तान गया और वर्ष 2014 में कनाडा चला गया। वह अपनी पत्नी के साथ शनिवार को बागपत पहुंचे।