सिटी ब्यूटीफुल की हरियाली देखकर मन को सुकून मिल जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंडीगढ़ की यह ग्रीनरी कई प्रयासों का नतीजा है। आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे लोगों के बारे में जो पर्यावरण सरंक्षण में अहम योगदान दे रहे हैं...
विज्ञापन
2 of 6
पावीला बाली
- फोटो : फाइल फोटो
ग्रीन वॉरियर के नाम से पहचानी जाती हैं पावीला बाली
चंडीगढ़ की पावीला बाली की पहचान ग्रीन वॉरियर के तौर पर होती है। साल 2017 से वे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं। पॉलिथीन के खिलाफ उन्होंने मेगा अभियान चलाया। दस हजार से ज्यादा कपड़े के थैले बंटवाए। ट्रिब्यून फ्लाईओवर के बनने से करीब 800 से ज्यादा पेड़ों का जीवन खतरे में था। चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ हाईकोर्ट में जाकर 800 पेड़ों को बचाया। पावीला स्वच्छता के प्रति इतनी संवेदनशील हैं कि यदि कोई उन्हें बता दे कि पार्क में गंदगी के ढेर लगे हैं तो अपनी टीम के साथ वे वहां पहुंच जाएंगी और कुछ ही घंटे में पार्क को साफ कर देंगी।
पर्यावरण सुरक्षा के पहरेदार राहुल महाजन
बागवानी विशेषज्ञ राहुल महाजन ने साल 2015 में पेड़ों को बचाने की मुहिम शुरू की थी। पुराने पेड़ों को बचाने के लिए उन्होंने ट्रांसप्लांट का काम शुरू किया। चंडीगढ़ के कई पेड़ों को बचाने के लिए उन्होंने अपने दम पर पेड़ों को ट्रांसप्लांट करके उन्हें नया जीवन दिया। कुछ साल पहले चंडीगढ़ के पेड़ों को दीमक से खतरा था। इसके लिए भी उन्होंने निशुल्क कीटनाशक का छिड़काव किया। इसके साथ ही वे हर साल मानसून सीजन में दस हजार पौधे स्कूलों, समाजसेवी संस्थाओं और आरडब्ल्यूए को निशुल्क देते हैं।
4 of 6
अनुपमा
- फोटो : फाइल फोटो
पानी को बचाने के लिए अनुपमा ने उठाई आवाज
चंडीगढ़ में सेक्टर 15 की अनुपमा पानी की एक-एक बूंद बचाने की दिशा में काफी सालों से काम कर रही हैं। वे लोगों के पास जाकर पानी के महत्व और उसे बचाने के तरीकों पर बातचीत करके उन्हें जागरूक करती हैं। वह शहर में पर्यावरण से जुड़ी कई संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए वे जगह-जगह टॉक करती हैं। वह बताती हैं कि यदि किसी को पेड़ लगाने की जगह न मिले तो वे कैसे कम जगह पर पौधे उगा सकती हैं।
बच्चों को हरियाली के करीब लेकर आईं मधु मार्गेट
पर्यावरण दिवस पर चंडीगढ़ में सेक्टर-28 की मधु मार्गेट का जिक्र जरूरी है। मधु हरियाली से दूर हो रही नई पीढ़ी को पिछले 11 सालों से ऑर्गेनिक खेती के लिए जागरूक कर रही हैं। वह हर साल 100 से 150 बच्चों को प्रशिक्षित करने का कार्य कर रही हैं। उनकी मेहनत का नतीजा यह हुआ कि अब उनके सिखाए बच्चे घर की छतों पर ऑर्गेनिक सब्जियां उगा रहे हैं। यही बच्चे आगे चलकर देश का भविष्य बनेंगे।
पर्यावरण के लिए यूके छोड़कर भारत में बसे प्रो. रविंद्र खैवाल
पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इन्वायरमेंट विंग में तैनात एडिशनल प्रोफेसर रविंद्र खैवाल साल 2011 में यूके की सिटीजनशिप को छोड़ भारत लौट आए। पीजीआई में काम करते-करते वे पर्यावरण के क्षेत्र में 100 से ज्यादा स्टडीज कर चुके हैं, जो सरकार को नीतियां बनाने में अहम साबित हो रही हैं। उनका मुख्य काम स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रदूषण के खतरे को कम करना है। वे भारत के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम में नॉलेज पार्टनर और स्वास्थ्य मंत्रालय के एयर पोल्यूशन और क्लाइमेंट चेंज प्रोग्राम में सेंटर आफ एक्सीलेंस हैं।