आजकल हो रही बारिश प्री मानसून नहीं है, जानिए आखिर ये कब दस्तक देगा। मानसून की पहचान के लक्षण क्या हैं और इससे क्या फायदे हो सकते हैं।
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चंडीगढ़ में प्री मानसून की बारिश का स्वागत
- फोटो : amar ujala
आजकल वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और अरब सागर से आई नमी के कारण बारिश हो रही है। फिलहाल मौसम विभाग ने भी इसे प्री-मानसून मानने से इनकार किया है। आईएमडी की ओर से भी इसे प्री- मानसून मानने से इनकार किया गया है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के हेड डॉ. राज सिंह ने कहा कि यह बरसात प्री मानसून नहीं है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और अरब सागर की आर्द्रता के कारण यह बारिश आई है।
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पंजाब में खेती और उत्पादन पर मॉनसून का असर
- फोटो : फाइल फोटो
डॉ. राज सिंह ने कहा कि प्री मानसून के कई लक्षण होते हैं। जिसमें आर्द्रता, हवा की स्पीड, बरसात का तरीका सहित अन्य कारण शामिल हैं। वहीं इस बार मानसून में बारिश से किसानों को काफी फायदा होगा। नरमा-कपास की फसल को यह बरसात लाभ देगी। बाजरा, ज्वार, ग्वार सहित अन्य फसलों की बिजाई अब तेजी से शुरू हो जाएगी। बागवानी की फसलों को भी इससे फायदा होगा।
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भीषण गर्मी से जल्द मिलेगी राहत
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून एक्सप्रेस की स्पीड सही रही तो 40 दिन बाद प्रदेश में मानसून दस्तक दे देगा। मानसून एक जुलाई को फरीदाबाद-पलवल से शुरू होकर पांच जुलाई तक पूरे हरियाणा में सक्रिय हो जाएगा। इस बार प्रदेश में करीब 96 प्रतिशत यानी करीब 442 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है। मानसून के संबंध में मौसम विभाग की ओर से पूर्वानुमान तैयार किया गया है।
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बारिश के अभाव में सूखने के कगार पर पहुंची धान
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों और पूर्व के रिकॉर्ड को आधार बनाते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग ने रिपोर्ट तैयार की है। इसके अनुसार मानसून एक जुलाई से हरियाणा के कुछ हिस्सों में सक्रिय हो जाएगा। यूपी के रास्ते मानसून फरीदाबाद-पलवल से प्रदेश में प्रवेश करेगा। पांच जुलाई तक मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद 14 सितंबर तक सक्रिय रहेगा।
प्रदेश में सबसे अधिक बारिश यमुनानगर के नारायणगढ़ क्षेत्र में होने की संभावना है। इस साल 96 प्रतिशत बारिश की संभावना जताई गई है। जबकि पिछले साल 106 प्रतिशत का अनुमान था। इस तरह एक साल 10 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में एक भी साल बारिश सामान्य स्तर पर दर्ज नहीं की गई। वर्ष 2014 में सबसे कम करीब 42 प्रतिशत बारिश हुई थी।