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देश में एक अनोखा गांव, जहां छतों पर खड़े हैं एयर इंडिया के जहाज, देखिए तस्वीरें

Mon, 12 Mar 2018 08:35 PM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, उप्पल भूपा (जालंधर)
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छतों पर अनोखे वाटर टैंक
हम आपको बताने जा रहे हैं, एक ऐसे अनोखे गांव के बारे में, जहां छतों पर एयर इंडिया के जहाज खड़े हैं। यकीं नहीं होता तो देखिए तस्वीरें।
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छतों पर अनोखे वाटर टैंक
ये हैं पंजाब के जालंधर का गांव लांबडा। यह हर घर की छत पर एयर इंडिया के जहाज खड़े मिलेंगे। एक एनआरआई के घर पर भी ऐसा जहाज खड़ा है, जो गांव में एंट्री करते ही नजर आने लगता है। अकेले जालंधर जिले में ही नहीं, बल्कि नूरमहल तहसील के उप्पला गांव में, कपूरथला, होशियारपुर और दोआबा के कई गांवों में ऐसे कई हवाई जहाज, शिप, कंगारु, प्रेशर कुकर आदि देखने को मिलेंगे, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं।
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छतों पर अनोखे वाटर टैंक
अब जानिए माजरा, दरअसल ये जहाज वाटर टैंक के डिजाइन हैं। कुछ लोगों ने शौकिया ऐसी टंकियां बनवाई हुई हैं तो कुछ ने घर में रहने वाले लोगों की पहचान कराने के लिए। जैसे अगर किसी की छत पर आर्मी का टैंक दिख जाए तो समझिए उस घर से कोई न कोई आर्मी में है। अगर छत पर प्लेन दिखे तो समझिए उस घर में एनआरआई. रहते हैं। जालंधर में रहने वाले संतोख सिंह ने अपने घर के ऊपर एक हवाई जहाज बनवाया है, जो टंकी नहीं बल्कि एक कमरा है।

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छतों पर अनोखे वाटर टैंक
एक घर की छत पर तो सिख महिला माई भागो की प्रतिमा बनी है, जो एक टैंक है और 'महिला सशक्तिकरण' का संदेश देता है। बता दें जालंधर के गांव उप्पल भूपा में अधिकतर परिवार एनआरआई हैं और गांव में एक दूसरे में होड़ सिर्फ पानी की टंकी के लिए लगी हुई है। गांव उप्पल से शुरू हुआ पानी की टंकी का क्रेज आसपास के गांवों में फैल चुका है, लेकिन अब बड़ी दिक्कत यह है कि इन तमाम पानी की टंकियों को बनाने वाले नाथ नामक कारीगर ने कारीगरी छोड़ दी है।

 
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छतों पर अनोखे वाटर टैंक
गांव में खास तौर पर एनआरआईज की कोठियां की छतों पर ऐसी टंकिया रखी गई हैं कि लोग किसी को नाम से कम पानी की टंकी के जरिये ज्यादा जानते हैं। अगर एयर इंडिया के जहाज वाली कोठी के बारे में पूछोगे, तो वहां के ग्रामीण आपको संतोख सिंह की कोठी पर ले जाएंगे। संतोख सिंह ने छत पर पूरा एयर इंडिया का जहाज बना रखा है, जिसको नाथ नामक कारीगर ने ही बनाया था। इसको बनाने में एक साल से अधिक का समय लगा।
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छतों पर अनोखे वाटर टैंक
गांव में अगर पानी वाले जहाज की कोठी के बारे में पूछोगे तो लोग आपको तरसेम सिंह बब्बू के घर ले जाएंगे, उनकी छत पर पानी का जहाज बना हुआ है। तरसेम सिंह उप्पल जब 70 साल पहले हांगकांग गए थे तो उन्होंने सफर शिप से किया था। अपने बेटों को अपनी पहली यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि हम भी अपने घर पर शिप बनवाएंगे। 1995 में यह शिप बनाई गई। इस ट्रेंड की शुरुआत करीब 70 साल पहले हांगकांग जाने वाले तरसेम सिंह ने की थी।

 
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छतों पर अनोखे वाटर टैंक
तरसेम सिंह ने अपनी कोठी के ऊपर पानी वाले जहाज के आकार की टंकियां बनवाई, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद गांव में इस तरह की टंकी बनाने का क्रेज तेजी से चल पड़ा। गांव में दो लोगों ने कमल के फूल की टंकी बना रखी है। इसको भी नाथ ठेकेदार ने बनाया है। एक टंकी अजीत सिंह की कोठी पर बनी है तो दूसरी सुरजीत सिंह की कोठी पर। दोनों ने बताया कि उन्होंने इसके लिए केवल 25 हजार रुपये डिजाइन और लेबर के खर्च किए हैं।

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पुत्तर तीन साल लग गए कंगारू बणबाउंदयां नूं...
गांव में स्थित भजन सिंह का बेटा मनविंदर सिंह गोरा ऑस्ट्रेलिया में रहता है। भजन सिंह परिवार समेत आस्ट्रेलिया गए तो वहां पर उनको सड़कों पर कंगारू मिले। वहीं से मनविंदर सिंह ने कहा कि डैडी जब इंडिया में कोठी बनानी है तो छत पर कंगारू जरूर बनवाना है। नाथ के पास टाइम नहीं था, नाथ की काफी मिन्नत की तो तीन साल लग गए छत पर कंगारू बनवाने के लिए।
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नाथ ने कारीगरी छोड़ी, अब डेरे की गद्दी पर बैठे....
नाथ को आसपास के गांवों के लोग खोजते फिरते हैं, वह महितपुर में डेरे की गद्दी पर बैठ गए हैं और कारीगरी छोड़ दी है। नाथ का कहना है कि वह अब काम नहीं करना चाहते। उनका कहना था कि अब मैं सिर्फ बता सकता हूं, ड्राइंग तैयार कर दूंगा, लेकिन हाथों से कारीगरी नहीं करूंगा। इलाके के लोग बताते हैं कि नाथ के हाथ में जो कारीगरी थी, वह अब नहीं मिल रही है।
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