जी हां यह बिल्कुल सच है। यकीन मानिए, इस मंदिर में मन्नत मांगने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। इस मंदिर का इतिहास भी काफी रोचक है।
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Amritsar News
यह दुनिया का दूसरा ऐसा मंदिर है, जो पूरे साल में सिर्फ एक महीने के लिए खुलता है। ऐसा एक मंदिर पाकिस्तान में है। इस मंदिर में चांदी की मूर्ति में आधा शरीर हनुमान जी और आध शरीर भैरव का है। ऐसा विश्व में दो ही मंदिर हैं जहां साल में केवल एक महीने के लिए ही पूजा की जाती है। प्रमुख मंदिर पाकिस्तान के मिंटगुमरी जिले के दिपालपुर में है तो दूसरा अमृतसर के बाबेया वाला बाजार में है। मंदिर का नाम है श्री बाबा लालू जसराये जी।
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हवन पूजा
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां विश्व भर से लोग औलाद मांगने के लिए मन्नत करने आते हैं। करीब 450 वर्षों पुराने इस मंदिर की खासियत यह है कि मंदिर के किवाड़ साल में एक महीने के लिए खुलते ही यहां पर औलाद की मन्नत मांगने वालों की कतारें लग जाती है। मंदिर की महानता को लेकर इसी बाजार की रहने वाली रेनू कपूर कहती हैं कि मंदिर एक माह ही खुलता है और इस एक माह उनके घर रिश्तेदारों का तांता लगा रहता है।
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हवन पूजा
राजेश खन्ना व विनोद खन्ना की चुटिया इसी मंदिर में उतरी
मंदिर के पंडित रामकृष्ण पांडेय (अयोध्या वाले) व मंदिर के संचालक सेवादार शामसुंदर कहते हैं कि इसी मंदिर में फिल्म स्टार राजेश खन्ना व विनोद खन्ना की चुटिया उतारी गई थी। इस मंदिर में औलाद की मन्नत मांगने दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं।
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जनेऊ संस्कार
सात समुदाय का कुल मंदिर है
इस मंदिर में वैसे तो हर धर्म के लोग औलाद मन्नत में मांगने आते हैं। लेकिन यह मंदिर खासकर सात समुदाय का कुलमिंदर है। इन सात समुदाय में खन्ना, कपूर, मल्होत्रा, मेहरा, सहगल, अरोड़ा व चोपड़ा वशंजों के नाम हैं। यहां पर इन सात समुदाय के बच्चों का नौ साल से लेकर उम्र की उस साल में चुटिया उतारी जाती है जो कि विषम हो। जैसे 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21 से लेकर 101 वर्ष तक। यहां चुटिया उतारने के लिए कोई उम्र का प्रावधान नहीं है।
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लकड़ी के खिलौने
चढ़ावे में चढ़ता है लकड़ी के खिलौने
इस मंदिर में चुटिया उतारने वालों को सुबह बिना नहाए हुए मंदिर में आना होता है। वहां पर पांच लकड़ी के खिलौने, एक नारियल, दूध की कढ़ाही चढ़ानी पड़ती है। मंदिर में चुटिया कटवाने के बाद प्रथा है कि मां का मुख नहीं देखना चाहिए। सुबह बिना नहाए हुए मंदिर में दर्शन करने की परंपरा है।
साल में एक महीने होता है जनेऊ संस्कार
इस मंदिर में साल में एक महीने जेनऊ संस्कार होता है। यहां प्रथा है कि जेनऊ धारण करने वाला मंदिर में सुबह बिना नहाए आकर पूजा करेगा और घर जाकर स्नान करके मां का आश्रीवाद लेगा।