फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनोखा मंदिरः कुएं की खुदाई करते समय यहां खुद प्रकट हुआ था शिवलिंग, देखिए तस्वीरें

Mon, 03 Feb 2020 02:42 PM IST
खुशबू गोयल नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 6
शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
तस्वीरों में देखिए एक अनोखा शिव मंदिर, जहां स्वयंभू शिवलिंग मौजूद है। यह शिवलिंग कुएं की खुदाई करते समय खुद प्रकट हो गया था। चंडीगढ़ में सेक्टर-24 स्थित शिवालय खेमपुरी चंडीगढ़ के सबसे पुराने मंदिरों में शामिल है। इसकी विशेषता है कि यहां पर शिवलिंग बनाया नहीं, बल्कि कुएं की खुदाई में निकला था। उसके बाद से इसकी मान्यता सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं, बल्कि आसपास के प्रदेशों में भी है।
विज्ञापन

2 of 6
शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ के कई वीआईपी इस मंदिर में दर्शन के लिए रोजाना पहुंचते हैं। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि कभी यह कैलड़ नाम का गांव था। गांव के लोग कुआं खोद रहे थे। इसी दौरान लोगों को पता चला यहां तो स्वयंभू शिवलिंग हैं तो उन्होंने उस स्वयंभू शिवलिंग को ईंटों से घेरकर जलहरी लगा दी और पूजा पाठ शुरू हो गया। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह मंदिर एक सौ वर्ष से ज्यादा पुराना है। उसके बाद वहां से हटकर अलग जगह कुआं खोदा गया। वह कुआं मंदिर प्रबंधन की ओर से आज भी संरक्षित किया जा रहा है। मंदिर में हर धार्मिक त्योहारों का आयोजन होता है। मंदिर का संचालन और प्रबंधन श्री सनातन धर्म सभा की ओर से किया जाता है।
विज्ञापन

3 of 6
शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कुएं के जल से होता है भगवान शिव का जलाभिषेक
शिवालय खेमपुरी के प्रबंधक गोबिंद हरि ने बताया कि सेक्टर-24 के शिवालय खेमपुरी में प्राचीन कुआं है। मंदिर प्रबंधन ने इसे संरक्षित कर रखा है। इसी कुएं के जल से रोजाना भोले बाबा का जलाभिषेक होता है। कुएं में कोई गंदगी न जाए इसके लिए उसे ऊपर से ढककर रखा गया है। चारों तरफ जाली भी लगाई है ताकि उसमें आक्सीजन जाती रहे। सावन में पूजा के लिए शिवालय में अभिषेक के लिए लोग एडवांस में बुकिंग कराते हैं। उन्होंने कहा कि सावन में सुबह 5 से 6 बजे तक ब्राह्मणों की ओर से अभिषेक करवाया जाता है। सुबह का जलाभिषेक भक्त करते हैं और शाम को अभिषेक व शृंगार यजमानों की ओर से किया जाता है।

4 of 6
Lord Shiva - फोटो : File Photo
वर्ष 2000 से लगातार हो रहा रुद्राभिषेक
श्री सनातन धर्म सभा के प्रधान सरदारी लाल गोस्वामी ने बताया कि मंदिर स्थित शिवालय में वर्ष 2000 से हर रोज भगवान शिव का शृंगार होता आ रहा है। प्राचीन मंदिर होने के कारण यह सिद्ध मंदिर है। दूर दूर से लोग माथा टेकने के लिए आते हैं। पहले मंदिर के दरवाजे छोटे थे। भक्त मंदिर में झुककर जाते थे। अब चांदी का दरवाजा लगाया गया है। पूजा के बर्तन भी चांदी के हैं। मंदिर में पुराना त्रिवेणी पेड़ भी है। मंदिर में शिवालय के अलावा राम परिवार, श्री लक्ष्मी नारायण, शीतला माता, सरस्वती माता, संतोषी माता की मूर्ति भी है। भक्त इनके दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में प्राचीन त्रिवेणी (बरगद, पीपल और नीम) का पेड़ है। इसकी रोज पूजा होती है।
विज्ञापन

5 of 6
lord shiva
स्वयंभू शिवलिंग हैं इस शिवालय में
श्री सनातन धर्म सभा के महासचिव आदर्श शर्मा ने बताया कि शिवालय खेमपुरी में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। यह बहुत प्राचीन मंदिर है। कभी यह कैलड़ गांव होता था। चंडीगढ़ के बसने से पहले यहां पर शिवालय था। यहां पर भारी संख्या में भक्त दूर-दूर से जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। शाम को रुद्राभिषेक और भव्य शृंगार होता है। हर दूसरे रविवार को भंडारा होता है। 1989 से हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
भगवान शिव - फोटो : अमर उजाला
मंदिर परिसर और बाहर लगे हैं बेल के पेड़
श्री सनातन धर्म सभा के कार्यकारिणी सदस्य सुरेश बंसल ने बताया कि भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए कोई सामान लाने की जरूरत नहीं है। मंदिर परिसर और उसके बाहर बेल के पेड़ हैं। सभा की ओर से संस्कृत महाविद्यालय का संचालन होता है। महाविद्यालय के विद्यार्थी सुबह मंत्रोच्चार के साथ भगवान का रुद्राभिषेक करते हैं। मंदिर में शमी के पेड़ के अलावा धतूरा, भांग, आक, रुद्राक्ष, अनार, जामुन, सफेद और लाल चंदन के पौधे लगाए गए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें