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बेमिसालः बेटे की शादी के कार्ड में लिखवा दिए ऐसे शब्द, जो समाज के लिए बन गए नजीर

Fri, 11 Jan 2019 12:10 PM IST
खुशबू गोयल महबूब अली, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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भारतीय दूल्हा
एक पिता की अनूठी पहल को सलाम, जो अपने बेटे की शादी में एक ऐसा काम करने जा रहे हैं, जो समाज के लिए एक मिसाल बन जाएगा। निमंत्रण पत्र में भी अनोखे शब्द लिखवाए हैं।
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शादी का कार्ड
करीब 36 साल पहले हरियाणा में रोहतक जिले के सांघी गांव के किसान तसवीर सिंह हुड्डा ने सड़क हादसे के बाद खून की कमी से तड़पकर दो लोगों को जान गंवाते देखा था। उन्होंने उसी दिन ठान लिया था कि वह रक्तदान की मुहिम का हिस्सा बनेंगे और जरूरतमंदों की जान बचाएंगे। तब से अब तक 129 बार रक्तदान शिविर लगा चुके किसान ने अब अपने बेटे की शादी से एक दिन पूर्व प्रीतिभोज के साथ ही रक्तदान शिविर लगाने का फैसला किया है।

 
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शादी का कार्ड
वह खुद भी 71 बार रक्तदान कर चुके हैं। इस अनूठी पहल के साथ ही उन्होंने शादी के कार्ड पर लिखवाकर मेहमानों व दोस्तों से आने के साथ ही 17 जनवरी को रक्तदान करने की भी अपील की है। एसपी व डीसी को भी किसान ने शादी में आने के लिए न्योता भेजा है। सांघी गांव निवासी तसवीर सिंह हुड्डा रोडवेज में मैकेनिक के पद पर तैनात हैं, साथ ही खेतीबाड़ी करते हैं। वे मां दानो देवी धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के चेयरमैन भी है।

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groom
किसान ने बताया कि उन्होंने अपने बड़े बेटे नवीन की शादी हाल ही में पानीपत के बुढ़श्याम में तय की है। अब 17 जनवरी को नवीन का प्रीतिभोज है, जबकि 18 को बारात की रवानगी होगी। तसवीर हुड्डा ने बताया कि पहले से ही उसकी इच्छा बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों की शादी में रक्तदान शिविर लगाने की थी ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर शादी में रक्तदान शिविर लगाका जरूरतमंदों को जीवनदान देते में सहयोग कर सकें।
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blood donation
तसवीर हुड्डा अब तक वह जिलेभर में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से 129 रक्तदान शिविर लगवा चुके हैं। वे खुद 71 बार रक्तदान कर चुके हैं। कई सामाजिक संगठन भी तसवीर को सम्मानित कर चुके हैं। तसवीर का छोटा बेटा नवनीत हुड्डा भी सोशल मीडिया से लेकर आसपास के गांवों में जाकर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक कर रहा है। अब तक वह भी खुद दस से अधिक बार रक्तदान कर चुका है।
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blood donation
तसवीर ने बताया कि वर्ष 1983 में सोनीपत से वह बस में सवार होकर रोहतक के लिए आ रहे थे। करंट लगने के कारण बस पलट गई थी। जिसमें वह भी घायल हो गए थे। इस हादसे में उन्हें अपना एक हाथ भी गंवाना पड़ा था, जबकि खून के अभाव में दो की मौत हो गई थी। इसके बाद ही तसवीर ने रक्तदान करने की ठान ली थी। वे वर्ष 2011 से लगातार रक्तदान शिविर आयोजित करा रहे हैं।

 
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blood donation
सांघी के तसवीर से अन्य को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। रक्तदान करने से जरूरतमंदों की समय पर जान बचाई जा सकती है।
- डॉ. यश गर्ग, डीसी, रोहतक
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