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3 बेटियों ने पूरी की पिता की अंतिम इच्छा, अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि भी

Sun, 18 Jun 2017 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मानसा(पंजाब)
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
न समाज की सुनी, न परंपरा आड़े आने दी। पिता की अंतिम इच्छा जो पूरी करनी थी, बस ये सोचते हुए 3 बेटियों ने ही बेटे का फर्ज निभाया, देखिए तस्वीरें।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
प्रसिद्ध नाटककार प्रो. अजमेर सिंह औलख का शुक्रवार को मानसा जिले के रामबाग में इंकलाबी नारों और गीतों की गुनगुनाहट के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। अर्थी को उनकी बेटियों सुपनदीप कौर, सोहज प्रीत कौर और अजमीत कौर ने कंधा दिया और फिर चिता को मुखाग्नि भी दी। इस दौरान उनकी मां भी बेटियों के साथ रही और इस काम में पूरा सहयोग किया।

 
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
संस्कार से पहले मजदूर और किसान जत्थेबंदियों की अगुवाई में शहर में इंकलाबी नारों के साथ प्रो. औलख की शवयात्रा निकाली गई। बाद में बिना किसी धार्मिक रस्म के इंकलाबी नारों व गीतों के बोलों के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम दर्शनों के लिए किसान जत्थेबंदियां, लेखक, प्रशासनिक अधिकारी, मजदूर जत्थेबंदियां और राजनीतिक पार्टियों के सदस्य पहुंचे।

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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
बता दें कि प्रो. अजमेर सिंह औलख का वीरवार सुबह उनके निवास स्थान पर निधन हो गया था। वे लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। अजमेर औलख को साल 2008 में कैंसर की बीमारी का पता चला था, जिसके चलते उनकी रीड की हड्डी में तकलीफ शुरू हो गई थी। वे पिछले एक महीने से फोर्टिस अस्पताल में भर्ती थे और एक हफ्ता पहले ही डिस्चार्ज हुए थे। उनके इलाज का सारा खर्च पंजाब सरकार ने उठाया था।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
अजमेर सिंह औलख पंजाबी भाषा के विख्यात साहित्यकार रहे। औलख का जन्म 19 अगस्त 1942 को पंजाब के मानसा जिले के गांव कुंभड़वाल में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री कौर सिंह और माता का नाम श्रीमती हरनाम कौर था। वह एक आदर्श अध्यापक थे। गांव किशनगढ़ फरमाही, भीखी और पटियाला में पढ़ाई करने के बाद अजमेर औलख मानसा के नेहरू कॉलेज में प्रोफेसर बने।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
इस दौरान उन्होंने नाटक ‘अरबद नरबद धंधुकारा’ लिखा। बाद में ‘बेगाने बोहड़ की छा’, ‘सत बिगाने’, चना दे पानी’, ‘गाकोमिका’, ‘इश्क जिन्हा दे हड्डी रचिया’, ‘सुखी कुख’ और ‘केहर सिंह की मौत’ आदि नाटक लिखे और प्रसिद्धि हासिल की। इनके द्वारा रचित एक नाटक इश्क बाझ नमाज़ दा हज नाही के लिये उन्हें सन् 2006 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
औलख को पंजाब सरकार की तरफ से ‘शिरोमणि पंजाबी नाटककार सम्मान’, ‘भारतीय संगीत नाटक अकादमी अवार्ड’, ‘भारतीय साहित्य अकादमी अवार्ड’, ‘पंजाबी साहित्य रत्न अवार्ड’ दिया गया था। गुरु नानक यूनिवर्सिटी अमृतसर द्वारा उन्हें पीएचडी की डिग्री दी गई। गुरशरण सिंह लोक कला सलाम काफिला द्वारा 8 मार्च 2015 को बरनाला में हुई किसान रैली में प्रो. औलख को ‘भाई लालो कला’ सम्मान दिया गया।
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मशहूर पंजाबी साहित्यकार अजमेर औलख नहीं रहे
औलख के नाटक पंजाबी और यूनिवर्सिटी के सिलेबस में भी शामिल किए गए हैं। वह केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा के अध्यक्ष रहने के अलावा इस समय जम्हूरी अधिकार सभा पंजाब के अध्यक्ष और ग्रीन हंट विरोधी आपरेशन के नेता भी रहे। उनका पूरा परिवार नाटक कला को समर्पित है। उन्होंने पंजाब और अन्य राज्यों के अलावा कनाडा में भी अपनी नाटक कला का लोहा मनवाया।

 
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