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Tokyo Olympic 2021: पिता चाहते थे बेटी कुश्ती खेले, मोनिका मलिक ने हॉकी स्टिक पकड़ रचा इतिहास

Thu, 22 Jul 2021 06:31 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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हॉकी खिलाड़ी मोनिका मलिक। - फोटो : फाइल
रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर एक नया इतिहास रचने वाली हॉकी खिलाड़ी मोनिका मलिक टोक्यो ओलंपिक में भी भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा होंगी। युवा खिलाड़ियों से सुसज्जित भारतीय महिला टीम को मोनिका मलिक के अनुभव और युवा जोश के बेहतरीन संगम का विशेष लाभ मिलेगा। हॉकी कोच राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में मोनिका ने हॉकी की बारीकियां सीखीं। अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर वह तेजी से एक दमदार खिलाड़ी के रूप में उभरीं। स्कूल व कॉलेज स्तर पर उनके खाते में उपलब्धियों की भरमार है। राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्धियों से झोली भरी हुई है। उनकी सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि ओलंपियन के रूप में है। वे कहती हैं कि 1980 में भारतीय महिला हॉकी टीम को ओलंपिक गेम्स में बुलाया गया था क्योंकि उस वक्त दक्षिण अफ्रीका की टीम हिस्सा नहीं ले सकी थी। जबकि सही मायनों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने रियो ओलंपिक-2016 के लिए क्वालीफाई किया।
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मोनिका मलिक। - फोटो : फाइल फोटो।
ऐसा पहली बार हुआ जब भारतीय टीम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सकी। अब दूसरी बार टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने क्वालीफाई किया है, जिसमें टीम के बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीदें हैं। सोनीपत जिले के अंतर्गत गोहाना खंड के गांव गामड़ी की मूल निवासी मोनिका का जन्म 5 नवंबर, 1993 को हुआ। बचपन से ही पिता तकदीर सिंह से खेलों के लिए मिले प्रोत्साहन से मोनिका ने 8वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही हॉकी की ओर कदम बढ़ा दिए। उनका कहना है कि हॉकी उन्हें रुचिकर गेम लगा। हालांकि पिता उन्हें कुश्ती में आगे बढ़ाना चाहते थे लेकिन बेटी की इच्छा को देखते हुए उन्होंने मोनिका को हॉकी में ही आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
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मोनिका मलिक। - फोटो : फाइल
मोनिका मलिक की कुछ विशेष उपलब्धियां
मोनिका मलिक ने 2012 में बैंकॉक में हुए छठे जूनियर एशिया कप में खेलते हुए रजत पदक जीता। वर्ष 2013 में उन्होंने जर्मनी में हुए जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक झटका तथा इसी वर्ष आयोजित तीसरी एशियन चैम्पियनशिप ट्रॉफी में रजत पदक प्राप्त किया। वर्ष 2014 में उन्होंने भोपाल (मध्य प्रदेश) में हुए चौथे सीनियर नेशनल गेम्स में रजत पदक झटका। इस प्रतियोगिता में मोनिका को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के खिताब से भी नवाजा गया। 2014 में ही दक्षिण कोरिया में आयोजित 17वें एशियन गेम्स में खेलते हुए उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके अलावा उन्हें हॉकी विश्व लीग राउंड-2015 में भी जगह मिली, जिसमें उन्होंने जीत का परचम लहराया।

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भारतीय महिला हॉकी टीम। - फोटो : @TheHockeyIndia
मोनिका ने विश्वविद्यालय स्तर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से खेलते हुए वर्ष 2012 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी हॉकी चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता। 2013 व 2014 में लगातार स्वर्ण पदक झटके। 2016 में सिंगापुर में आयोजित एशियन चैंपियनशिप ट्रॉफी में भारतीय टीम ने स्वर्णिम पताका फहराई है, जिसमें मिड फील्डर मोनिका मलिक ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। खेलों के साथ-साथ मोनिका पढ़ाई में भी पीछे नहीं रहीं। मोनिका ने प्रथम श्रेणी में स्नातक किया। उन्हें वर्ष 2014 में सीनियर नेशनल गेम्स में दमदार प्रदर्शन के बल पर सेंट्रल रेलवे में नौकरी मिली। ओलंपिक में टीम इंडिया को सफलता नहीं मिल सकी।
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भारतीय महिला हॉकी टीम। - फोटो : @TheHockeyIndia
मोनिका का कहना है कि भारतीय टीम को पहली बार ओलंपिक में खेलने का मौका मिला। अब टीम ने ओलंपिक का अनुभव हासिल कर लिया है, जिसका लाभ उन्हें टोक्यो ओलंपिक में मिलेगा। अर्जेंटीना की प्रसिद्ध खिलाड़ी आइमर को मोनिका मलिक अपनी आदर्श खिलाड़ी मानती हैं। आइमर को खेलते देखकर वे बहुत कुछ सीखती हैं। उनका कहना है कि आइमर हर प्रकार की परिस्थितियों में टीम को मजबूती प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय महिला खिलाड़ियों को तनाव में बेहतरीन प्रदर्शन की कला सीखनी चाहिए। बड़े टूर्नामेंट्स में माइंड गेम भी चलता है। इसके अलावा उन्होंने नए उभरते खिलाड़ियों को अच्छा खेलने और खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
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