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बेटे की शहादत पर रोई नहीं मां, अर्थी को दिया कंधा, कही ये बड़ी बात

Thu, 07 Dec 2017 09:16 AM IST
आर रघुवंशी/अमर उजाला, बटाला(पंजाब)
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शहीद पलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
कम उम्र में ही देश के लिए छाती पर गोली खाने वाले शहीद को श्रद्धांजलि देने पूरा शहर उमड़ पड़ा। अंतिम संस्कार पर देखिए, ऐसा था मंजर...
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शहीद पलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
दिन 4 दिसबंर। शहीद पलविंदर सिंह का फोन पर पत्नी को आखिरी संदेश। जहां मैं तैनात हूं, वहां पर आतंकियों से आमने-सामने गोलाबारी हो रही है, लेकिन तुम चिंता मत करना। सब ठीक है और मैं बिल्कुल ठीक हूं। परिजनों के मुताबिक शाम करीब पांच बजे जहां पलविंदर सिंह की सलामती का फोन आया था, वहीं रात करीब 8.45 मिनट पर उसके शहीद होने का भी फोन आ गया। 
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शहीद पलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार
माता सुरजीत कौर और पिता संतोख सिंह वासी गांव रायेचक्क ने भावुक होकर बताया कि जब भी उनका बेटा घर छुट्टी पर आता तो उनकी सेवा में लगा रहता था। हर हाल में उनको खुश रखने के लिए बातें करता था। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनके बेटे ने अपने देश के लिए शहादत दी है। उन्होंने कहा कि उसके जाने से घर में जो स्थान खाली हुआ है, वह कभी पूरा नहीं होगा।

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शहीद पलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार
शहीद पलविंदर की 9 साल की बेटी सिमरणदीप कौर तीसरी कक्षा की छात्र है और बेटा सहजदीप सिंह (6) पहली कक्षा का छात्र है। दोनों बच्चे सहमे खड़े थे। वे लोगों के चेहरों की ओर लगाकर देख रहे थे। बच्चों ने बताया कि पापा 16 अक्तूबर को छुट्टी पर एक माह के लिए आए। उन्होंने एक वादा किया था कि जब वह दोबारा छुट्टी पर आएंगे तो वह बाहर घूमने चलेंगे। 
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शहीद पलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार
शहीद की पत्नी पलविंदर कौर ने कहा कि उसके पति ने अपनी देश की खातिर सीने पर गोली खाई है। इस दौरान जहां पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल था, वहीं पूरे गांव रायेचक्त में बुधवार को मातम छाया हुआ था। सोमवार देर शाम को श्रीनगर के काजी कुंड के पास आतंकियों से लोहा लेते समय बटाला के गांव रायेचक्क का रहने वाले 10 सिख बटालियन के हवलदार पलविंदर सिंह शहीद हो गए थे।
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शहीद पलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार
मैं भी करुंगा देश की सेवा
शहीद के चार वर्षीय सिमनदीप को भले ही कभी दीन दुनियां की अधिक जानकारी नहीं है, लेकिन अपने पिता की बहादुरी की बातें सुन कर उसका कहना है कि वह भी अपने पिता की तरह फौजी बन कर देश की सेवा करना चाहता है। परिवार को चलाने वाले मुखियां को गवाने के बावजूद शहीद की पत्नी का हौसला प्रस्त नहीं हुआ है। इसके चलते उनका भी कहना है कि वह अपने बेटे को देश की सेवा के लिए भारतीय सेना में जरूरी भेजेंगे।
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