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80 साल बाद बेहद दुर्लभ सूर्यग्रहण, नौ राशियों के लिए घातक, बाकी तीन पर ऐसा रहेगा असर

Sun, 21 Jun 2020 01:47 AM IST
खुशबू गोयल नीरज कुमार, चंडीगढ़
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80 साल बाद 21 जून को ऐसा दुर्लभ सूर्यग्रहण लगने जा रहा है, जो नौ राशियों के जातकों के लिए घातक साबित हो सकता है, जबकि तीन पर इसका बेहद खास असर पड़ेगा।
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अमावस्या के दिन चांद जब सूर्य तथा पृथ्वी के मध्य आ जाता है तो इस आकाशीय घटना को सूर्यग्रहण कहा जाता है। जब चांद की छाया पूर्ण रूप से सूर्य को ढक लेती है तो यह पूर्णग्रास सूर्यग्रहण कहलाता है। जब सूर्य की छाया चांद से बड़ी होती है और चांद की छाया सूर्य की छाया को पूरी तरह से ढक नहीं पाती तो इस अवस्था में सूर्य एक चांदी के चमकते कंकण अथवा वलय के आकार में दिखाई देता है, जिसे वलयाकार अथवा कंकण सूर्यग्रहण कहते हैं। यह बात चंडीगढ़ में सेक्टर-30 स्थित श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही।
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पंडित मिश्र ने कहा कि इस बार कंकण सूर्यग्रहण रविवार के दिन लग रहा है, इसलिए यह चूड़ामणि सूर्यग्रहण कहलाएगा। 21वीं सदी का कंकण चूड़ामणि सूर्यग्रहण योग 80 साल के बाद बना है। 21 जून को लगने वाला वर्ष का पहला सूर्यग्रहण मिथुन राशि में प्रारंभ होकर आर्द्रा नक्षत्र में समाप्त होगा। ग्रहण का सूतक ग्रहण के समय से 12 घंटे पूर्व अर्थात 20 जून की रात दस बजे से शुरू होगा।

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पंडित मिश्र ने कहा कि यह कंकण सूर्यग्रहण मिथुन राशि में घटित होगा। इस समय सूर्य, चंद्रमा, बुध तथा राहु ग्रह मिथुन राशि में स्थित हैं।  मिथुन राशि का नक्षत्र मृगशिरा आद्रा है। मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल, आद्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है तथा मकर राशि में नीच बृहस्पति के साथ वक्री शनि का संबंध है। इसलिए यह ग्रहण अनिष्टकारी है। इसमें अतिवृष्टि, अनावृष्टि, महामारी का भयंकर प्रकोप, प्राकृतिक आपदा, तूफान एवं आंतरिक तथा बाहरी शत्रुओं का प्रकोप रहेगा।
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ग्रहण के समय यह करें
ग्रहण के समय की जाने वाली गतिविधियों के बारे में बताते हुए पंडित मिश्र ने कहा कि शास्त्रों में चूड़ामणि ग्रहण में पवित्र नदियों गंगा, संगम, तीर्थ क्षेत्र में स्नान, दान, जप आदि का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। जब ग्रहण का प्रारंभ हो रहा हो तब स्नान करने के बाद जप करना चाहिए। मध्यकाल में हवन, देवपूजा, मंत्र साधना इत्यादि तथा ग्रहण की समाप्ति पर पुन: स्नान करने के पश्चात दान करना चाहिए।
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ग्रहण के समय यह न करें
सेक्टर-18 के श्रीराधा कृष्ण मंदिर के पुजारी और देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने कहा कि सूर्यग्रहण के समय मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए। भोजन नहीं करना चाहिए। सोना भी नहीं चाहिए। इसके साथ ही गर्भवती स्त्री को सब्जी काटना निषेध है।
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कोरोना के चलते घर में ही ऐसे करें स्नान
नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज का कहना है कि कोरोना के कारण सार्वजनिक परिवहन लगभग बंद हैं। जबकि ग्रहण के दौरान लोग तीर्थ स्थानों पर जाकर पवित्र नदियों में स्नान करते थे। इस बार कोरोना महामारी के चलते ऐसा करना संभव नहीं है। ऐसे में लोग घरों में ही पवित्र तीर्थ के जल को पानी में मिलाकर स्नान करें। ग्रहण समाप्ति के बाद वैसे तो पवित्र नंदी में स्नान करना चाहिए, पर इस बार तालाब, कुएं या बावड़ी में स्नान करें। यह भी संभव न हो तो घर पर पानी में तीर्थ जल मिलाकर स्नान करें।
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राशि और ग्रहण पर प्रभाव
मेष---लाभ,
वृष----धनहानि
मिथुन----दुर्घटना, चोट, अवसाद
कर्क------धनहानि
सिंह------लाभ उन्नति
कन्या-----रोग, कष्ट, विपत्ति
तुला------चिंता, संतान को कष्ट
वृश्चिक---शत्रु से परेशानी, राजपक्ष से हानि
धनु-------स्त्री/पुरुष को एक-दूसरे से कष्ट
मकर-----हानि, कष्ट
कुंभ-----आवश्यकता से अधिक खर्च
मीन------उन्नति और धन लाभ
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