10 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है। कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने का यह बढ़िया समय है, इसके लिए ये तरीका अपना सकते हैं।
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सावन का महीना
चंडीगढ़ में सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र देवी पार्वती ने भी सावन में शिव जी को प्रसन्न करके उन्हें पति रूप में पाया था। लड़कियां भी मनचाहा वर पा सकी हैं, बस सावन के महीने में सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव का ध्यान करें और नियमित शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
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सावन का महीना
- फोटो : self
पुराणों के अनुसार सावन में किया गया जलाभिषेक अन्य दिनों में की अपेक्षा अधिक फलदायी होता है। सावन के सोमवार के दिन व्रत रखें। अगर नर्जल व्रत नहीं रख सकते तो फलाहर के साथ व्रत रखा जा सकता है। शिव पुराण का पाठ करें। इस पुराण में बताया गया है कि सावन में इसका पाठ और श्रवण मुक्तिदायी होता है।
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भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र शामिल करें। तांबे का नाग भगवान शिव को अर्पित करें। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इससे कालसर्प, सर्प योग और राहु केतु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। धतूरा और भांग भगवान शिव को अर्पित करें। मिट्टी से शिवलिंग बनाकर नियमित इसकी पूजा करें। दूध दान करें। शाम के समय भगवान शिव की आरती पूजा करें।
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ऐसे करें शिव पूजन
कहते हैं कि भगवान शिव एक लोटा जल में भी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। यदि कोई व्यक्ति शिवजी की कृपा प्राप्त करना चाहता है तो उसे रोज शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए। विशेष रूप से सावन के हर सोमवार शिवजी का पूजन करें। इस नियम से शिवजी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। भगवान की प्रसन्नता से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परेशानियों दूर सकती हैं।
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पूजन की सामान्य विधि
सोमवार को सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर शिवजी के मंदिर जाएं। मंदिर पहुंचकर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें। इस व्रत में एक समय रात्रि में भोजन चाहिए। दिन फलाहार किया जा सकता है। साथ ही दूध का सेवन भी किया जा सकता है। संकल्प के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। गाय का दूध अर्पित करें। इसके बाद पुष्प हार और चावल, कुमकुम, बिल्व पत्र, मिठाई आदि सामग्री चढ़ाएं।
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- फोटो : amar ujala
पूजन में शिव मंत्र का जप करें
सावन के महीने में शिव पूजन के साथ ही शिव मंत्र 1- ऊँ महाशिवाय सोमाय नम:। या शिव मंत्र 2-ऊँ नम: शिवाय। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग सर्वश्रेष्ठ रहता है। शिव परिवार (प्रथम पूज्य श्री गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी, नाग देवता) का भी पूजन करें।
इस वर्ष सावन 10 जुलाई को सुबह पांच बजकर 32 मिनट पर सोमवार से शुरू हो रहा है और समाप्ति भी सोमवार को हो रहा है। इस बार सावन में 26 वर्षो के बाद शिव महा जयंती योग बन रहा है।सावन का प्रारंभ और अंत सोमवार को होने, इसके अलावा दोनों पक्षों की प्रतिपदा सोमवार को होने सावन में पांच सोमवार होने और कन्या राशि में बृहस्पति होने के कारण शिव महा जयंती योग बन रहा है।