गांव में एक साथ जली चिताएं।
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मृतक पवन कुमार, रमन, लाभ सिंह, लखवीर सिंह, अरूण, विशाल व शिव के शव दोपहर बाद अलग-अलग एंबुलेंस से घर लाए गए। इस दौरान जब बुजुर्ग सुरजीत के घर के आंगन में चार शव रखे गए तो सबकी आंखें भर आईं। बुजुर्ग सुरजीत सिंह और परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। लाल चंद ने अपने दो बेटों को खो दिया है। सड़क हादसे की वजह से वह खुद चलने फिरने में सक्षम नहीं है। बेटा रमन और लव का आखिर बार चेहरा देख उनका कलेजा फट गया। पिता ने कहा कि बेटों को ही परिवार का सहारा बनना था लेकिन वे साथ छोड़ गए, अब उनका क्या होगा। बेसुध मां कभी दोनों बेटों को दुलारती तो कभी पुचकारती रही। यह दृश्य जिसने देखा वह रोने लगा।