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सिद्धू को मुक्का पड़ा भारी: नवजोत की सजा पर पीड़ित परिवार की आई पहली प्रतिक्रिया, बड़ी बात कह दी

Fri, 20 May 2022 12:12 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
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नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : फाइल
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को 1988 के रोड रेज मामले में एक साल कारावास की सजा सुनाई है। इसके बाद मृतक 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह के परिवार ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। गुरुवार को पटियाला में पीड़ित परिवार ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान परिवार ने वाहेगुरु का शुकराना किया। 
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नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : फाइल
रोड रेज में मरने वाले गुरनाम सिंह की बहू परवीन कौर ने कहा कि हम बाबा जी का शुकराना करते हैं। हमने सब कुछ बाबा जी पर छोड़ दिया था। बाबा जी ने जो किया, वह सही किया। हमें वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था। वहीं मृतक गुरनाम सिंह के पौत्र सैबी सिंह ने भी अदालत के फैसले पर खुशी जताई। 
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नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : फाइल
गौरतलब है कि यह रोड रेज मामला 34 साल पुराना है। उस समय नवजोत सिंह सिद्धू क्रिकेटर थे और घटना वाले दिन वह अपने दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरांवाला गेट स्थित मार्केट में गए थे। वहां पार्किंग में उनकी एक 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह के साथ कहासुनी हो गई थी। इस दौरान सिद्धू ने बुजुर्ग को घुटने से मारकर गिरा दिया था। आनन-फानन बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया, जहां पर हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई थी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को महज 1000 रुपये के जुर्माने के साथ छोड़ दिया गया था। 

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नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : फाइल
केस में कब-कब क्या हुआ
  • 27 दिसंबर 1988 की शाम को पटियाला के कोतवाली थाने में सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ
  • 1999 में सिद्धू को राहत देते हुए सत्र कोर्ट ने केस को खारिज कर दिया था
  • 2002 में पंजाब सरकार ने सिद्धू के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की
  • 1 दिसंबर 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू और संधू को दोषी ठहराते हुए 3-3 साल की कैद की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया
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नवजोत सिंह सिद्धू (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
  • 11 जनवरी 2007 में सिद्धू ने कोर्ट में सरेंडर किया और उन्हें जेल भेज दिया गया
  • 12 जनवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की सजा पर रोक लगाई। सिद्धू और उनके दोस्त को जमानत मिली। उधर शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट शरण ली
  • 15 मई 2018 को सुप्री मकोर्ट ने सिद्धू को गैरइरादतन हत्या के आरोप से बरी किया लेकिन गुरनाम सिंह को चोट पहुंचाने के लिए एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया, संधू बरी।
  • 12 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुआ
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