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SP संगीता ही अकेली नहीं, सच की सजा झेलने वाले अफसर ये भी

Wed, 02 Dec 2015 08:07 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फतेहाबाद की एसपी संगीता कालिया के ट्रांसफर को भले ही मंत्री विज से भिड़ने की सजा मानी जा रही हो, लेकिन वे ऐसी अकेली अफसर नहीं। पहले भी ऐसे अफसर रहे हैं, जिन्होंने सच बोलने की सजा झेली है। देखिए, ऐसे अफसर।
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1991 बैच के आईएस अधिकारी अशोक खेमका अपने भ्रष्टाचार विरोधी तेवरों के चलते वह काफी लोकप्रिय रहे। 2004 में जब सरकार ने कई शिक्षकों का सत्र के बीच में ही तबादला किया था, तो उन्होंने तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला तक का आदेश मानने से इनकार कर दिया था। रॉबर्ट वाड्रा लैंड डील को कैंसल कर सुर्खियों में आए खेमका अब हरियाणा की खट्टर सरकार को भी खटके तो उनका 46वां तबादला कर दिया गया।
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हरियाणा के आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी भी शुरू से सरकार के निशाने पर रहे। कासनी की 17 साल की सेवा अवधि में 63वां तबादला हो चुका है। कासनी करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में खर्च हुए करीब छह सौ करोड़ रुपये का हिसाब मांगते ही अपने पद के दायित्व से हाथ धो बैठे। कासनी अब तक की सरकारों में साइड लाइन पोस्टिंग काटते आए हैं। भाजपा शासनकाल में सरकार ने उन्हें एक माह तक खाली बिठाए रखा।

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वर्ष 2010 में मंत्री विज का टकराव अंबाला की तत्कालीन एसपी भारती अरोड़ा से हुआ था। इस मामले में मंत्री विज जेल भी पहुंचे थे। विज की समर्थक से पुलिस ने दुर्व्यवहार किया था, जिसके बाद विज ने मौके पर पहुंचकर पुलिस का विरोध किया। अरोड़ा ने विज के खिलाफ केस दर्ज करवाकर उन्हे जेल भिजवा दिया था, लेकिन बाद मों मामला कोर्ट में चला और विगत वर्ष पुलिस के आरोप झूठे पाए गए और विज को बरी किया गया।
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साल 2015 में मंत्री रहते हुए विज का टकराव तत्कालीन एसडीएम मीनाक्षी गोयल से हो गया था। विज ने एक फरियादी की एप्लीकेशन को अपने खुले दरबार में मार्क कर उसे एसडीएम के पास भेजा था। मगर एसडीएम खुले दरबार में पहुंचने पर नाराज हो गई और उसने गुस्से में विज के साइन वाली एप्लीकेशन ही फाड़ दी। विज ने एसडीएम की शिकायत सीएम से की थी, थोड़े समय बाद ही एसडीएम का तबादला कर दिया गया।
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साल 2015 में ही मंत्री विज का टकराव निगम कमिश्नर कमलप्रीत कौर से भी हुआ। दरअसल, कमिश्नर ने सिटी के पूर्व विधायक के बेटे की दुकान पर जेसीबी चला दी थी। दुकान के आगे पड़ा सामन खुद ही उठाने का आग्रह करते हुए कमिश्नर ने जेसीबी चला दी। जिससे पूर्व विधायक के बेटे को हार्ट अटैक हो गया। विज ने नगर निगम कमिश्नर की शिकायत भी पूरी घटना के साथ सीएम को भेजी, जिसके बाद कमिश्नर का भी तबादला हो गया।
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दिसंबर 2014 में करनाल से ट्रांसफर होकर आईं कुरुक्षेत्र की सीएमओ डॉ. वंदना भाटिया भी इनमें से एक हैं। हरियाणा सरकार के राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी और कुरुक्षेत्र से सीएमओ डा. वंदना भाटिया के बीच फोन पर हुई बातचीत वायरल हो गई थी। मंत्री विज ने इस मामले में मुख्यमंत्री खट्टर को चिट्ठी लिखकर सीएमओ के तबादले की सिफारिश कर दी। उसके बाद सीएमओ वंदना भाटिया को तबादला कर कुरुक्षेत्र भेज दिया गया।
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