तारीख: 6 जून 1984, जगह अमृतसर स्थित दरबार साहिब....और ऑपरेशन ब्लू स्टार। इतिहास में कभी न भूलने वाला सच। तस्वीरों में देखिए, आखिर क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार?
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
ऑपरेशन ब्लू स्टार को जानने से पहले उन परिस्थतियों को जानना जरूरी है, जिसके कारण ये हालात पैदा हुए। पंजाब में हिंसा की शुरुआत 1978 में हुई थी। उसी समय सिख धर्म प्रचार संस्था के प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरांवाले का नाम चर्चा में आया।
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Operation Blue Star
1981 के बाद जब पंजाब में हिंसक गतिविधियां बढ़ने लगीं तो भिंडरांवाले के ख़िलाफ लगातार हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगने लगे, लेकिन पुलिस का कहना था कि उनके ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। अप्रैल 1983 में पंजाब पुलिस के उपमहानिरीक्षक एएस अटवाल की दिन दिहाड़े हरमंदिर साहिब परिसर में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस का मनोबल लगातार गिरता चला गया।
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Operation Blue Star
ऑपरेशन ब्लू स्टार के हालात एक जून से ही बनने शुरू हो गए थे। एक जून को स्वर्ण मंदिर परिसर और उसके बाहर तैनात केंद्र रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स के बीच गोलीबारी हुई थी। स्वर्ण मंदिर परिसर में हथियारों से लैस संत जरनैल सिंह, कोर्ट मार्शल किए गए मेजर जनरल सुभेग सिंह और सिख स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के लड़ाकों ने चारों तरफ़ खासी मोर्चाबंदी कर रखी थी।
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Operation Blue Star
लोगों का नरसंहार होता देखकर इंदिरा गांधी सरकार ने पंजाब में दरबारा सिंह की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। पंजाब में स्थिति बिगड़ती चली गई। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार से तीन महीने पहले तक हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 298 हो चुकी थी।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
- फोटो : फाइल फोटो
तीन जून को गुरु अर्जुन देव के शहीदी दिवस को लेकर हज़ारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जमा थे। उधर, तीन जून तक ही भारतीय सेना अमृतसर में प्रवेश कर गई थी और स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर चुकी थी। शाम में कर्फ़्यू लगा दिया गया था। चार जून को सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी ताकि चरमपंथियों के हथियारों और असले का अंदाज़ा लगाया जा सके।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
5 जून 1984: स्वर्ण मंदिर परिसर को बाहर से सेना ने चारों ओर से घेर रखा था। इंदिरा गांधी ने सेना को स्वर्ण मंदिर परिसर में घुसने और ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाने का आदेश दे दिया। जिसके बाद वहां परिसर में भीषण खून-खराबा हुआ।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
5 जून 1984: स्वर्ण मंदिर परिसर को बाहर से सेना ने चारों ओर से घेर रखा था। इंदिरा गांधी ने सेना को स्वर्ण मंदिर परिसर में घुसने और ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाने का आदेश दे दिया। जिसके बाद वहां परिसर में भीषण खून-खराबा हुआ।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
- फोटो : फाइल फोटो
भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार, ऑपरेशन ब्लू स्टार में 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया, लेकिन इन सब आंकड़ों को लेकर अब तक विवाद चल रहा है। सिख संगठनों का कहना है कि हज़ारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे और मरने वाले निर्दोष लोगों की संख्या भी हज़ारों में है।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
- फोटो : फाइल फोटो
सरकार की इस बर्बर कार्रवाई से खफा कई प्रमुख सिखों ने या तो अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया या फिर सरकार द्वारा दिए गए सम्मान लौटा दिए। सिखों और कांग्रेस पार्टी के बीच दरार उस समय और गहरा गई जब दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने कुछ ही महीने बाद 31 अक्तूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से कांग्रेस और सिखों की बीच की खाई और गहरा गई।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
- फोटो : फाइल फोटो
ऑपरेशन ब्लू स्टार का ब्रिटेन कनेक्शन: स्वर्ण मंदिर में 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार पर ब्रिटेन के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रैचर ने स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी आतंकियों से मुक्त कराने की सैन्य कार्रवाई में भारत की मदद की। हालांकि ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने ब्रिटेन की किसी भूमिका से इंकार किया है, लेकिन 30 वर्षों की अवधि के बाद गोपनीयता कानून से बाहर आए इन साक्ष्यों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती।
गरमा गई थी सियासत: ब्रिटेन के लोकप्रिय समाचार पत्र ‘गार्जियन’ का कहना है कि अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के पूरा होने के बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रैचर ने इंदिरा गांधी के प्रति पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए एक निजी नोट भेजा था। इस नोट में कहा गया है कि पृथक सिख राष्ट्र की मांग की पृष्ठभूमि में ब्रिटेन भारत की अखंडता का पूरा समर्थन करता है। यह नोट 20 जून 1984 को भेजा गया था, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन के विशेष सुरक्षा बल की भूमिका से इनकार किया।