कश्मीर में घर के अंदर घुसे आतंकवादियों का डटकर सामना किया। लेकिन दुश्मन की गोलियां लगने से पैरालाइज के चलते सेना ने बोर्ड आउट कर दिया। इसके बाद मन में टीस जरूर रही लेकिन रज्जाक ने अपने मन में ठान लिया कि वह हर हाल में सेना का हिस्सा ही रहेगा। लिहाजा रज्जाक ने युवाओं को सेना में भर्ती कराने का सपना अपनी आंखों में संजोया ताकि उनके माध्यम से वह सेना में खुद को देख सके।
बंटवारे के समय पूर्वजों ने चुना था भारत देश प्रेम
रज्जाक मोहम्मद के खून में ही देशभक्ति भरी है। बतौर रज्जाक भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय वह यहीं रहते थे। उस समय उनके पूर्वजों ने अपने देश यानी भारत में ही रहना चुना था। पहले कोई सेना में नहीं था। जब वह 9वीं कक्षा में हुए थे तो पड़ोस में रहने वाले सेना के जवान गुलजार मोहम्मद से सेना में जाने के लिए प्रेरित हुए।
परिवार का सेना से रहे जुड़ाव, इसलिए भाई के बेटों को कर रहे तैयार
रज्जाक ने अपने भाई के बेटे आदिल को गोद लिया। अब वह अपने परिवार से आदिल व भाई के बेटे आसिम को सेना में जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्हें सेना से जुड़े हर कार्यक्रम में ले जाते हैं ताकि देशभक्ति की भावना उनमें कूट-कूटकर भर सके और उन्हें सेना का हिस्सा बना सके। गांव के बच्चों व युवाओं में भी अपने संघर्ष की कहानी से जोश भर रहा है