अगर आपका वजन तेजी से घट रहा है तो संभल जाएं। अनदेखी की तो पछताएंगे, जिंदगी बरबाद हो जाएगी और कुछ कर भी नहीं पाएंगे।
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पंजाब में बच्चों में कैंसर तेजी से फैल रहा है। इंटरनेशनल एजेंसी के सर्वे के मुताबिक यहां हर रोज 19 साल तक की उम्र के करीब 4 बच्चे कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।
एसपीएस अस्पताल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बच्चों की कैंसर विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका गुप्ता ने बताया कि बच्चों में लगातार बढ़ते कैंसर के कारण डब्ल्यूएचओ हर साल 15 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय चाइल्डहुड कैंसर-डे मनाता है।
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कैंसर पर रिसर्च कर रही एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के दौरान पंजाब में हर साल जीरो से 19 साल तक की उम्र के 969 से 1543 बच्चों में कैंसर पाया जाता है। यानि हर रोज करीब 4 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। लुधियाना मेडिकल का हब होने के कारण सूबे में कैंसर के इलाज में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि एसपीएस अस्पताल पिछले कई सालों से बच्चों के कैंसर का सफल इलाज करता आ रहा है।
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यहां बच्चों के लिए कीमोथैरेपी यूनिट, आईसीयू, लैमेलर लो कीमोथैरेपी चैंबर और इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की केयर के लिए ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध है। यहां पंजाब अलावा कई अफ्रीकी देशों के बच्चे भी इलाज के लिए आ रहे हैं। जल्दी पता चलने पर इलाज संभव है। लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर कुछ कैंसरों से बचा जा सकता है। इसके लिए स्मोकिंग, तंबाकू, जर्दा, लाल मीट, तनाव व मोटापे से परहेज करना होगा।
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उन्होंने बताया कि अगर किसी बच्चे को पेशाब करने में दिक्कत आ रही हो या पेशाब में खून आता हो, उसके शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ बन रही हो, पेट में लगातार दर्द हो रहा हो, पेट या कमर में सूजन लग रही हो, दौरे पड़ रहे हों या तेज सिरदर्द के साथ बच्चे के व्यवहार में बदलाव होता हो, शरीर पर दर्द रहित लाल या बैंगनी रंग के धब्बे बनने लगें, थकान, एकाएक तेज बुखार और अचानक वजन कम होना कैंसर के लक्षण हैं। यह दिखते ही तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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ओंकोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नवदीप सिंह ने बताया कि फरवरी महीना कैंसर की रोकथाम और इसके तुरंत इलाज के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए जाना जाता है। एसपीएस अस्पताल में भी लगातार एक हफ्ते तक कैंसर स्क्रीनिंग कैंप लगाया गया था। उन्होंने बताया कि पुरुषों सिर-गर्दन, प्रोस्टेट, फेफड़े, पेट व गाल ब्लैडर का कैंसर ज्यादा पाया जाता है। जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट, बच्चेदानी के मुंह (सर्विक्स), गॉल ब्लैडर, कॉलन व फेफड़ों का कैंसर पाया जाता है।
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की-होल सर्जरी से फूड पाइप कैंसर का इलाज
सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अरिंदम घोष ने बताया कि उत्तर भारत के पंजाब, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर राज्यों में फूड पाइप (भोजन की नाली) का कैंसर महामारी की तरह फैल रहा है। यह कैंसर से होने वाली मौत के तीन मुख्य कारणों में से एक है। सतगुरू प्रताप सिंह (एसपीएस) अस्पताल में हम लोग की-होल सर्जरी से इसका सफल इलाज करते आ रहे हैं।
पारंपरिक सर्जरी में जहां गर्दन, छाती व पेट तक चीरा देना पड़ता है, वहीं की-होल सर्जरी से इसकी जरूरत नहीं पड़ती। दर्द रहित इस सर्जरी में खून का नुकसान भी कम होता है। सर्जरी के बाद शरीर पर कोई निशान नहीं पड़ता और इसकी रिकवरी तेजी से होती है। कट नहीं लगने के कारण इंफेक्शन की संभावना भी कम रहती है।